तरनतारन रोड फ्लाईओवर के रूप शहर को एक और फ्लाईओवर मिल गया है। तीन साल के लंबे समय के बाद बुधवार को इसका काम पूरा हो गया। अब फिनिशिंग दी जा रही है।
यहां स्ट्रीट लाइट्स तक लगा दी गई हैं, जिन्हें कनेक्शन दिया जाना बाकी है। हालांकि कोरोना के कारण इसके जल्द उद्घाटन की उम्मीद कम है।
इसलिए लोगों ने खुद ही इससे आवाजाही शुरू कर दी है। फ्लाईओवर से शहर करीब दो लाख लोगों को फायदा होगा। पुल के आसपास के रिहायशी इलाकों के अलावा तरनतारन, फिरोजपुर, बठिंडा और श्री गंगानगर जाने वाले लोगों को अब दबुर्जी पुल की तरफ से चक्कर लगाकर नहीं जाना होगा।
तीन तरफ निकलेगा 3 किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर
यह पूरा फ्लाईओवर 3 किलोमीटर का होगा, जो शहर के 3 तरफ से निकलेगा। इसका एक चौथा हिस्सा फ्यूचर एक्सटेंशन के तौर पर छोड़ा गया है।
आने वाले समय में अगर जरूरत पड़ी तो इसे तैयार कया जाएगा। फ्लाइओवर की एक एक्टेंशन तरनतारन रोड स्थित बीबी कौलां जी भलाई केंद्र अस्पताल से होते हुए सुल्तानविंड रोड और एक तरनतारन रोड की तरफ निकलेगी। इससे तरनतारन की तरफ जाने वाले और वहां से यहां आने वाले लोगों को काफी आसानी होगी।
150 करोड़ रुपए खर्च, दो बार बढ़ी काम पूरा करने की डेडलाइन
तरनतारन रोड फ्लाईओवर प्रोजेक्ट की शुरुअात मई 2017 में हुई थी। इसकी शुरुआत लागत 113 करोड़ रुपए थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 150 करोड़ किया गया। प्राेजेक्ट में हुए बदलावों के कारण यह कास्ट बढ़ाई गई थी। वहीं काम पूरा करने की डेडलाइन पहले सितंबर 2019 थी, फिर अप्रैल 2020 हुई। अब मई महीने में इसका काम पूरा हो गया।
200 मीटर की रोटरी पर बना पुल, 1 महीने में उद्घाटन की उम्मीद
इस फ्लाईओवर का सबसे अलग डिजाइन दिया गया है। इसमें एक रोटरी बनाई गई है, जो नहर के ऊपरी हिस्से पर भी होगी। यह रोटरी करीब 200 मीटर की है, जबकि बठिंडा में बनाए गए फ्लाईओवर में रोटरी 60 मीटर है। पीडब्ल्यूडी ने ब्रह्मपुत्रा इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी से इसका निर्माण करवाया है।
कंपनी के पीके वर्मा ने कहा कि फ्लाईओवर को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि करीब एक महीने तक इसका उद्घाटन होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि पूरे नॉर्थ इंडिया में इस डिजाइन का यह इकलौता फ्लाईओवर होगा।
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May 28, 2020 at 05:05AM
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