आज मंगलवार है ताे आज भगवान हनुमान के दर्शन घर बैठे करिए। पचरंगा बाजार में स्थित स्वयंभू हनुमान मंदिर के यूं ताे बहुत प्रसिद्ध है और किस्से भी बहुत हैं। लेकिन इसकी पानीपत में मान्यता बहुत हैै। लाॅकडाउन में भक्त नहीं आते, लेकिन पुजारी हर मंगलवार और शनिवार काे सिंदूर का लेप करते हैं। बुजुर्गाें का दावा है कि यह प्रदेश का पहला स्वयंभू मंदिर है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां हर शनिवार काे भक्ताें काे प्रसाद के रूप में मीठा पान मिलता है। विकास गाेयल अाैर हरिश बंसल ने बताया कि हम सुनते आए हैं कि मंदिर के नीचे एक सुरंग भी थी। सुरंग में नाग देवताओं का वास हाेता था। लेकिन कुछ साल पहले उसे बंद करवाया गया है क्याेंकि उसमें किसी के जाने का खतरा बना रहता था।
उन्हाेंने बताया कि यहां एक कुआं भी हाेता था जिसका बहुत मीठा पानी हाेता था। लेकिन कुएं का दाैर खत्म हाेने के बाद यहां नलकुप बनवाया गया था, लेकिन आज हर घर में अपना कन्केशन है ताे इसका भी प्रयाेग नहीं हाेता। पुजारी देश नारायण उपाध्याय ने बताया कि यह मंदिर पूर्वायन काॅलाेनी में स्थित है। इस काॅलाेनी का नाम इसलिए पड़ा था क्याेंकि यहां पुराने जमाने में टीले के ऐसे मुहाने थी, जिसमें सूर्य देव की पहली किरण पानीपत पर पड़ती थी। किला पर सेना ठहरती थी, सैनिक देवी मंदिर के साथ-साथ यहां भी नतमस्तक हाेते थे।
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दैनिक भास्कर,,1733
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