रोडवेज कर्मचारियों द्वारा उनको एकांतवास किए जाने के विरोध में बस स्टैंड फाजिल्का में रोष प्रदर्शन किया गया। उनका कहना है कि वे लोक प्रशासन के आदेशों के बाद राजस्थान से मजदूरों को लेने के लिए गए थे और इस दौरान सभी मजदूरों के साथ-साथ उनकी भी हर तरह की जांच की गई थी। इसके बाद तब उन लोगों को अपने घरों में वापस जाने को कहा गया था लेकिन अब दोबारा फिर से उनको बुलाकर एकांतवास करने के निर्देश दिए गए हैं। इस कारण उनकी ओर से यह रोष प्रदर्शन किया जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि प्रशासन द्वारा उनको अपने अपने घरों में ही एकांतवास किया जाए। देर शाम को रोडवेज के कर्मचारी खुद ही बस स्टैंड में बने शैड के नीचे खुद ही एकांतवास में चले गए।
पंजाब रोडवेज कांट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन सब डिपो फाजिल्का के प्रधान मनप्रीत सिंह व प्रितपाल सिंह गिल ने बताया कि उनको 26 अप्रैल को जिला प्रशासन से आदेश आए थे कि वह जैसलमेर जाकर मजदूरों को लेकर फाजिल्का आएं। वीरवार को दो दिन बाद उनको जिला प्रशासन के अधिकारियों का फोन आया था कि उनके टेस्ट किए जाएंगे। जब वे यहां पहुंचे तो उनको कहा जाने लगा कि उनको भी एकांतवास में रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि उनको एकांतवास में रखा जाना था तो पहले इसकी जानकारी देनी चाहिए थी ताकि वे अपने कपड़ों का इंतजाम करके आते। उन्होंने बताया कि दोपहर 12.30 बजे उनको फोन आया कि तुरंत बस स्टैंड टेस्ट करवाने पहुंचे किंतु शाम के 7 बजने के बाद उनको कहा जा रहा है कि वह गांव घल्लू के स्कूल में एकांतवास में चले जाएं। उन्होंने बताया कि गर्मी का मौसम होने के चलते मच्छरों की भरमार है किंतु इस गर्मी के सीजन में सरकार ने उनको बीमार करने का मन जरूर बना रखा है।
कर्मियों का आरोप-राजस्थान से मजदूर लाने के वक्त नहीं किया रोटी-पानी का प्रबंध
रोडवेज कर्मियों ने बताया कि 3 दिन पहले जबकि वे राजस्थान गए हैं तथा लगभग 1500 किलोमीटर बस चलाने के बावजूद उन्होंने 3 रात सोकर भी नहीं देखा न ही उनके लिए रोटी-पानी का प्रबंध किया गया। वहीं उनको जहां मास्क व सैनिटाइजर भी घटिया कंपनी के उपलब्ध करवाए गए थे। वहीं राजस्थान के डीसी साहिब को उनके द्वारा कहा गया कि 33 यात्री बस में भेजे जाएं किंतु जबरन उनके द्वारा 50 यात्री बस में डालकर भेजे हैं। वहां के प्रशासन द्वारा कोई सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया गया बल्कि वे वहां फंसे यात्रियों से पीछा छुड़ाना चाहते थे। यूनियन सदस्यों ने बताया कि बिना परमिट के उनकी गाड़ियां राजस्थान में दाखिल करवाईं। इस धक्का-मुक्की में उनके ड्राइवरों व कंडक्टरों का नुकसान भी हुआ। उनकी एकमात्र मांग है कि उनके सैंपल लेकर उनको अपने घरों में भेजा जाएं जहां पर वे एकांतवास में रहने के लिए तैयार हैं।
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May 02, 2020 at 05:00AM
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