जिले में रिकवरी रेट बढ़ कर 90.40 फीसदी हो चुका है। 30 जून को लुधियाना का रिकवरी रेट 67.91 फीसदी था। 92 दिनों बाद जिले का रिकवरी रेट 22.49 फीसदी बढ़ गया है। जोकि राहत की खबर है। 30 जून तक लुधियाना के कुल 879 संक्रमित थे। जिनमें से 597 रिकवर हुए और 21 मौतें हुई थी। केस कम थे लेकिन उस समय रिकवरी रेट भी कम था। लेकिन अगस्त, सितंबर में केस और मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ा लेकिन रिकवरी रेट भी बेहतर हुआ है।
वहीं, पॉजिटिव आने वाले मरीजों की संख्या में भी गिरावट हो रही है। 36 दिनों बाद लुधियाना में 160 से कम पॉजिटिव मरीज मिले हैं। वीरवार को दूसरे जिले और राज्यों को मिलाकर 155 संक्रमित केस सामने आए हैं। इनमें से 129 लुधियाना और 26 दूसरे जिलों व राज्यों से संबंधित हैं। इससे पहले 28 अगस्त को जिले में 107 पॉजिटिव केस सामने आए थे। जिनमें से लुधियाना के 90 संक्रमित थे। वहीं वीरवार को हुई 10 मौतों में से 3 लुधियाना जिले से संबंधित हैं।
14 जुलाई को पहली बार लुधियाना के 3 की हुई थी मौत
14 जुलाई को जिले में पहली बार कोविड-19 पॉजिटिव 3 लोगों की मौत हुई थी। उसके बाद 25 जुलाई को लुधियाना के 2 मरीजों की मौत हुई। इसके बाद से मृतकों का आंकड़ा 5 से ज्यादा ही रहा। अगस्त-सितंबर में मृतकों का आंकड़ा दोहरी संख्या में ही रहा। 15 सितंबर को सबसे ज्यादा 27 लोगों की मौत हुई। जिसमें से 19 लुधियाना से संबंधित थे।
वीरवार को जिले के 3 लोगों की मौत हुई। यानी 68 दिनों के बाद जिले में 4 से कम मौत हुई हैं। वीरवार को हुई मौत में तीनों मृतक सिटी से संबंधित थे। दो मरीज हाइपरटेंशन के मरीज थे। जबकि एक मरीज को कोई बीमारी नहीं थी। मृतकों की उम्र 93 साल(निवासी मॉडल टाउन), 85 साल(नजदीक सीएमसी) और 54 साल(लक्कड़ बाजार) थी।
जिले में सिर्फ 988 एक्टिव केस
जिले में अब तक 18087 संक्रमित आ चुके हैं। लेकिन राहत की खबर ये है कि जिले में एक्टिव केस अब सिर्फ 988 ही हैं। एक्टिव केस में से 574 होम आइसोलेट, 68 सरकारी और 220 प्राइवेट हॉस्पिटल्स में एडमिट हैं। लेकिन अब तक 746 लोगों की मौत हो चुकी है। पॉजिटिव केस में से लुधियाना सिटी के ही 16015 पॉजिटिव केस आ चुके हैं।
वहीं, 746 मौतों में से 654 लुधियाना सिटी के रहने वाले थे। दूसरे जिलों व राज्यों से संबंधित अब तक 2250 पॉजिटिव केस आ चुके हैं। जिनमें से 175 एक्टिव केस हैं और 253 की मौत हो चुकी है। वीरवार को जिले में 5009 सैंपल्स लिए गए। जिनमें से 1340 आरटी-पीसीआर, 3650 रैपिड एंटी जैन और 19 ट्रूनेट पर रहे।
एक ही मरीज की आरटी-पीसीआर और रैपिड की रिपोर्ट अलग-अलग आई
एक ही मरीज की रिपोर्ट रैपिड पर निगेटिव और आरटी-पीसीआर पर पॉजिटिव आने से मरीज परेशान हो रहे हैं। हाल ही में पक्खोवाल रोड शहीद भगत सिंह नगर के व्यक्ति द्वारा यूसीएचसी जवद्दी से कोविड की जांच करवाई गई। जहां पर रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उनके परिवारिक जनों द्वारा भी जांच करवाई गई। जिसमें रैपिड एंटी जैन में तो उनका बेटा व पत्नी निगेटिव आ गए। लेकिन उसी सैंपल की आरटी-पीसीआर में बेटे की रिपोर्ट दो दिन बाद पॉजिटिव आई। रिपोर्ट दो दिन बाद पॉजिटिव आने के चलते बेटा जहां मां के संपर्क में रहा।
वहीं, मौके पर उसे स्लिप पर निगेटिव लिख कर दिए जाने से वो पशोपेश में रहा कि आखिरकार वो किस रिपोर्ट को मानें। बेटे ने बताया कि एक रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उसने वीरवार को फिर से जांच करवाई। जिसमें वो फिर से निगेटिव आ गया। वहीं, इस संबंध में यूसीएचसी जवद्दी की एसएमओ डॉ. सुरिंदर पाल कौर ने बताया कि हम आरटी-पीसीआर की रिपोर्ट को सबसे वैध मानते हैं। क्योंकि वो लैब की रिपोर्ट है। रैपिड एंटी जैन में अगर रिपोर्ट पॉजिटिव है तो उसे पॉजिटिव ही माना जाता है। लेकिन निगेटिव आने पर हम आरटी-पीसीआर करवाते हैं।
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October 02, 2020 at 04:36AM
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