Amazon

Friday, May 22, 2020

फर्जी फर्म बनाकर लाखों का टैक्स चोरी करने पर शर्मा ट्रेडिंग कंपनी पर केस दर्ज

सिविल लाइन थाना पुलिस ने मैसर्ज डायमंड डिस्प्ले काॅन्ट्रेक्टर सुनील कुमार की शिकायत पर शर्मा ट्रेडिंग नामक फर्जी कंपनी बनाकर लाखों रुपये टैक्स चोरी करने का केस दर्ज किया है। यह मामला सीएम फ्लाइंग स्क्वायड तक पहुंचा था। इसके बाद पुलिस के पास शिकायत पहुंची थी, जिस पर उक्त एक्शन हुआ है।काॅन्ट्रेक्टर सुनील कुमार ने आरटीआई के तहत खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी एक व दो से ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों में खर्च राशि की सूचना मांगी थी। दोनों खंडों में 90 के लगभग ग्राम पंचायत हैं। बार-बार अपील के बावजूद महज 10 ग्राम पंचायतों की जानकारी मिली थी।

तीन ग्राम पंचायतों की सूचना से एक ऐसी फर्म का पता लगा जोकि फर्जी है। इसका न तो कराधान विभाग में पंजीकरण था, न ही ऐसी फर्म बाजार में संचालित थी। आरोप है कि फर्जी रसीद बुक जारी करके सरकार का लाखों रुपयों का टैक्स हड़प लिया। जैसा कि वर्ष 2012 में हरियाणा सरकार ने ग्राम पंचायतों को विकास कार्यों के लिए अनुदान सीधे ही उनके खाते में डालना शुरू किया था। इसके लिए अलग से सरकार के अनुसार खाता खोलने में पंचायतों को निर्देश दिए थो।

हिसार -1 व हिसार 2 की अधिकांश ग्राम पंचायतों ने हिसार शहर स्थित निजी बैंक खाते खोले। सरकार के निर्देशानुसार जो भी कार्य करवाया जाए उसकी तकनीकी स्वीकृत पंचायत राज में तकनीकी विभाग से लेकर उनकी देखरेख मे कार्य करवाए जाए।बिल एसडीओ पंचायत राज व जेई से सत्यापित कराए जाएं क्योंकि ग्राम पंचायतों में करोड़ों रूपये का अनुदान प्राप्त हुआ था। इसलिए कुछ फर्मों ने इसमें टैक्स के भी काफी घपले किए हैं। इसकी गहनता से जांच होनी चाहिए। एक ऐसी फर्म थी जो वास्तव में फर्म थी ही नहीं। फर्जी बिल बुक छपवाकर लाखों रूपये का टैक्स चोरी कर गई।

जानिए... कैसे हुआ मामले का खुलासा
आरोप है कि इस फर्म में तीन ग्राम पंचायतों किरतान, ढाणी पीरांवाली, मंगाली झारा के बिल प्राप्त हुए थे। इस फर्म का नाम शर्मा ट्रेडिंग कंपनी सी/ओ 728/4 तहसील रोड हिसार है। इस पते पर कभी कोई मैटेरियल सप्लाई करने वाली फर्म देखी ही नहीं गई तो इसकी पुष्टि करने के लिए जिला कराधान अधिकारी से आरटीआई से मांगी सूचना में खुलासा हुआ कि जो फर्म का टीआईएन नंबर-2013035960 इस पर कोई फर्म पंजीकृत नहीं है। फर्जी टीआईएन नंबर लगाकर फर्म बनाई है। नियमानुसार सरकारी निर्देश हैं कि प्रत्येक 20 हजार से ऊपर राशि का बिल एसडीओ पंचायत राज से सत्यापित होना और 20 हजार से नीचे का खंड में जेई से सत्यापित होने के साथ पंचायत खाते में इंट्री होनी चाहिए। लेकिन ये बिल न तो जेई और न ही एसडीओ ने सत्यापित किए। इन बिलों को इसलिए सत्यापित नहीं करवाया ताकि फर्म बारे भेद न खुल जाए। इस बात की जानकारी मिलने के बाद जब खंड हिसार –1 की सभी ग्राम पंचायतों से इसी फर्म से संबंधित बिलों की सूचना मांगी गई। केवल कुछ पंचायतों को छोड़कर अन्य किसी ने इस फर्म का सामान खरीदा ही नहीं। सूचना आयोग में अपील करने पर भी संबंधित जानकारी नहीं दी। इस घोटाले को छुपाया जा रहा है। दूसरी फर्म वाले भी खुलकर नहीं बता रहे हैं।

बैंक कर्मी के रिश्तेदार की फर्म थी
इस बारे जब पास उपलब्ध बिल की ग्राम पंचायतों से उस समय के सरपंचों से संपर्क किया तो पता चला कि इंडसेंड बैंक कर्मी के रिश्तेदार की फर्म थी। उस कर्मी का भाई खंड हिसार –1 में कर्मचारी है। फर्म कहां है किसी को नहीं पता। यह बात भी सामने आई कि फर्म संचालक की मृत्यु हो चुकी है। इस बारे में पड़ताल करने पर पता चला कि ये रसीदें फर्जी फर्म की बैंक का कर्मी राहुल जारी करता था। इसकी कोई फर्म नहीं थी। सामान कहीं से खरीदने पर 13.25 प्रतिशत टैक्स का कुछ लाभ सरपंच को देता था और बाकी खुद रख लेता था। सरपंच लालचवश सामान जहां से खरीदते उनको नकद भुगतान कर दिया जाता था। आरोप है कि वर्ष 2013 से 2015 तक फर्जीवाड़ा चलता रहा। 8 जनवरी 2014 को काराधान में फर्म रजिस्टर करवाकर टीआईए नंबर ले लिया मगर इसके नाम कोई बिल जारी नहीं हुए। 29 जनवरी 2015 को फर्म बंद हुई थी। कांट्रेक्टर के अनुसार हमारे पास केवल तीन पंचायतों के बिल हैं, जिन्हें पांच लाख रुपये का टैक्स चोरी किया है यदि दोनों खंडों की पंचायतों की जांच बिल मंगवाकर की जांच की जाए तो लगभग 60-70 लाख रुपये टैक्स चोरी के मामले की संभावना है।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today

https://ift.tt/2LNQRsH
दैनिक भास्कर,,1733

No comments:

Post a Comment