पठानकोट जिले की ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मोर्चे की मीटिंग में कामरेड नथा सिंह डढवाल की अध्यक्षता में हुई। इस मौके पर मजदूरों की मांगों पर चर्चा की गई। मजदूर विरोधी फैसलों और देश के अंदर पिछले दो महीनों से लागू लॉकडाउन के दौरान मजदूरों के साथ किए नफरत भरे व्यवहार के खिलाफ देश की समूची ट्रेड यूनियनों ने लॉकडाउन की पालना करते 22 मई को सभी जिला हेडक्वार्टरों पर सुबह 10 से शाम 6 बजे तक भूख हड़ताल कर धरने देने फैसला किया।
नत्था सिंह ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल के शुरू में मजदूर जमात की तरफ से लंबे संघर्षों के बाद मजदूर समर्थक बनवाए लगभग 44 कानूनों को खत्म कर कारपोरेट घरानों के हक में चार लेबर कोड में तबदील कर दिया। अब कोविड-19 महामारी के खतरे से बचाव के लिए देश में लागू लॉकडाउन का गलत इस्तेमाल कर विश्व स्तर पर प्रचलित आठ घंटे काम दिहाड़ी को बढ़ाकर 12 घंटे करने का फैसला कर मजदूर विरोधीमानसिकता साबित कर दी है। पंजाब सरकार ने भई केंद्र सरकार केनक्शे कदमों पर चलकर पहली मई को जारी मिनिमम वेजनोटिफिकेशन को एक हफ्ते बाद ही वापस लेकर मजदूरों के साथ धोखा किया है।
सत्य देव सैनी, अमरीक सिंह, केवल कालिया, विनोद कुमार, हरबंस लाल, सचिव सिंह और शिव कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, त्रिपुरा और अन्य राज्य सरकारों ने सभी मजदूर समर्थक श्रम कानूनों को तीन-चार सालों के लिए सस्पेंड कर दिया है।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
https://ift.tt/3bKJXii
May 19, 2020 at 05:00AM
No comments:
Post a Comment