जिले से अब तक 1.50 लाख से ज्यादा प्रवासी मजदूर अपने राज्यों को पलायन कर चुके हैं। अभी यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। वहीं, लॉकडाउन 4.0 में तमाम छूट दी गई है। इंडस्ट्री-कारखाने शुरू कर दिए गए हैं।
इसके बाद रजिस्ट्रेशन करवाने वाली करीब 30 फीसदी लेबर ने फैसला बदला है और वे लौटने से इनकार कर रहे हैं। शायद यह भी बड़ा कारण है कि रोजाना प्रति ट्रेन के लिए विभागीय तौर पर 2 हजार लोगों को कॉल-एसएमएस किया जाता है। इनमें से करीब 30 फीसदी लोग ऐसे हैं, जो जाने से मना कर रहे हैं। यह भी बात सामने आ रही है कि ऐन मौके पर ट्रेन जाने से पहले भी कई लोग अपना मन बदल चुके हैं। वहीं, अब फैक्ट्रियां चलने से कई लोगों को काम मिल गया है। इस वजह से गांव जाने से अब परहेज कर रहे हैं।
संकट की घड़ी में परिवार के साथ रह सकें
कारोबार बंद होने से कुछ कारोबारियों ने लेबर को कह दिया है कि उनके पास अभी काम नहीं है। इसलिए वे सभी अपने गांव की तरफ लौट जाएं। कई के माता-पिता, बीवी-बच्चे दूसरे राज्यों में ही हैं, इसलिए चाहते हैं कि संकट में वे साथ रहें।
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May 20, 2020 at 05:00AM
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