हजारीबाग में मंगलवार को गुड़गांव से लौटे एक प्रवासी मजदूर को प्रशासनिक लापरवाही की कीमत माैत से चुकानी पड़ी। इलाज के लिए भटकते हुए ट्रांजिट कैंप स्टेडियम की सीढ़ी पर ही लेट गया। जहां इलाज के अभाव में उसने सोमवार मंगलवार की आधी रात को दम तोड़ दिया। इचाक थाना क्षेत्र के बरवां निवासी प्रवासी मजदूर बैजनाथ राम को जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के द्वारा एचएमसीएच अस्पताल के वैकल्पिक व्यवस्था के तहत बनाए गए लाइफ केयर ले जाया गया जहां अस्पताल प्रबंधन इसके इलाज के प्रति गंभीर नहीं हुआ। लाइफ केयर में 10 रुपए में मरीजों का इलाज की व्यवस्था किए जाने का प्रशासनिक दावा से प्रवासी मजदूर की मौत के बाद सच्चाई से पर्दा उठ गया। मौत के बाद उसके शव को मुर्दाघर में रखा गया है उसके स्वाब सैंपल को जांच के लिए रिम्स भेजा गया है। इधर मजदूर की मौत के बाद और आए दिन सीएस और सुपरिंटेंडेंट के बीच उत्पन्न होते रहे विवाद की रिपोर्टिंग उपायुक्त के द्वारा किए जाने के बाद मंगलवार को सिविल सर्जन और हजारीबाग मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षक को हटा दिया गया। वही मजदूर की मौत मामले में डीसी डॉक्टर भुवनेश प्रताप सिंह ने जांच का आदेश दिया है।
डाॅ. संजय जायसवाल बने हजारीबाग के नए सिविलसर्जन
हरियाणा गुड़गांव से पहुंचे एक प्रवासी मजदूर बैजनाथ राम उम्र 22 वर्ष पिता स्वर्गीय नागेश्वर राम की मौत 18-19 मई की रात्रि 2:30 बजे संत कोलंबा कॉलेज स्थित बनाए गए ट्रांजिट कैंप में हो गई। मृतक इचाक प्रखंड के बरवा का रहने वाला है। मृतक का शव पोस्टमार्टम हाउस में रखा गया है । उसका स्वाब सैंपल लेकर जांच के लिए रिम्स भेजा गया है। जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर उसका अंतिम संस्कार सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासनिक स्तर पर किया जाएगा। उसकी मौत के बाद सिविल सर्जन डॉ कृष्ण कुमार और अस्पताल अधीक्षक डॉक्टर केके लाल पर लापरवाही का आरोप लगाया गया है। डीसी डॉ भुवनेश प्रताप सिंह ने जांच का आदेश दिया है। डीसी के रिपोर्ट पर सरकार ने तत्काल इस मामले में संज्ञान लेते हुए सिविल सर्जन डॉ कृष्ण कुमार और एचएमसीएच के अधीक्षक डॉक्टर के के लाल को स्थानांतरित कर दिया है। सिविल सर्जन डॉ कृष्ण कुमार का तबादला स्वास्थ्य निदेशालय में कर दिया गया है और एसीएमओ डॉ संजय जायसवाल को हजारीबाग का नया सिविल सर्जन बनाया गया है। डॉक्टर के के लाल का तबादला दुमका मेडिकल कॉलेज अस्पताल कर दिया गया है और एचएमसीएच मेडिसिन विभाग के प्राध्यापक डॉ. संजय कुमार सिन्हा को नया अधीक्षक बनाया गया है।
लाइफ केयर हॉस्पिटल में इलाज नहीं हाेने पर पहुंचा था ट्रांजिट कैंप दिनभर सीढ़ियों में लेटा रहा, मौत के बाद जांच के लिए रिम्स भेजा सैंपल
बताया जाता है कि बैजनाथ राम 17 मई को रात में गुडगांव से वापस लौट कर इचाक मोड पहुंचा। पेट दर्द अधिक रहने के कारण इचाक मोड़ स्थित शिव मंदिर मे ठहर गया। उसकी हालत को देखते हुए और कोरोना वायरस के संक्रमण के डर से आसपास के लोगों ने इसकी सूचना इचाक मोड़ पर खड़े पीसीआर वाहन को दी। पीसीआर वाहन में मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसे इलाज के लिए पीएचसी इचाक ले गए। जहां डॉक्टर ओमप्रकाश ने उसका प्रारंभिक इलाज किया। फिर उसकी गंभीर हालत को देखते हुए लाइफ केयर अस्पताल रेफर कर दिया। ममता वाहन से उसे लाइफ केयर अस्पताल लाया गया। लेकिन लाइफ केयर अस्पताल के प्रबंधन ने इस पर संज्ञान नहीं लिया। इसी बीच ममता वाहन वापस लौट गई। इलाज नहीं होने के कारण वह भटकते हुए जांच के लिए संत कोलंबा कॉलेज स्टेडियम में बनाए गए ट्रांजिट कैंप में पहुंच गया। 18 मई को दिन भर स्टेडियम की सीढ़ियों पर पड़ा रहा। किसी ने उसकी सुध नहीं ली। रात में जब वह पेट दर्द बढ़ने से तड़पने लगा तो वहां रात्रि ड्यूटी में तैनात प्रशिक्षु आईएएस सौरभ कुमार की नजर उस पर पड़ी। उन्होंने संज्ञान लेते हुए चिकित्सकों और एंबुलेंस को खोजने का प्रयास किया। लेकिन वहां न तो कोई चिकित्सक मौजूद थे और न एंबुलेंस उपलब्ध था। फोन लगाकर अस्पताल प्रबंधन से उक्त प्रवासी को बचाने के लिए मदद भी मांगी। लेकिन अधीक्षक से लेकर सिविल सर्जन ने फोन नहीं उठाया। पेट दर्द से तड़पते हुए 2:30 बजे उसकी मौत हो गई। इसके बाद वहां दूसरे राज्य से आए प्रवासी लोग लापरवाही का आरोप लगाते हुए हल्ला हंगामा करने लगे। इसकी जानकारी मिलते ही सदर एसडीओ मेघा भारद्वाज अहले सुबह चार बजे स्टेडियम पहुंची। उन्होंने हल्ला हंगामा करते रहे प्रवासियों को समझाया और मामला शांत कराया। लेकिन कोरोना वायरस के डर से वहां उपस्थित कोई भी लोग उसके शव को छूना नहीं चाह रहे थे। सुबह छह बजे मुर्दा कल्याण समिति के मो. खालिद पहुंचे। उन्होंने पीपीई किट सहित अन्य सुरक्षात्मक उपाय कर शव को पोस्टमार्टम हाउस तक पहुंचाया। समाचार लिखे जाने तक मृतक का शव पोस्टमार्टम हाउस में पड़ा था। एहतियातन कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर उसका स्वाब कलेक्शन कर जांच के लिए रिम्स भेज दिया गया। जांच रिपोर्ट की प्रतीक्षा की जा रही थी। बताया जाता है कि लॉकडाउन शुरू होने के 15 दिन पहले वह काम की तलाश में गुड़गांव हरियाणा गया था। मृतक के पिता जीवित नहीं है। उसका विवाह भी नहीं हुआ था।
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May 20, 2020 at 05:00AM
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