पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (पीएयू) टीचर्स एसोसिएशन के चुनावों को लेकर यूनिवर्सिटी में सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। दोनों ही ग्रुपों ने अपने चुनावी एजेंडे प्रसारित करने शुरू कर दिए हैं। वहीं, टीचर्स की समस्याओं को भी ज्यादा गंभीरता से सुनने के साथ ही सत्ता में आने पर उनकी परेशानियों के हल का भरोसा भी दिया जा रहा है। एक तरफ डॉ. राकेश शारदा ग्रुप और दूसरी तरफ डॉ. एचएस किंगरा ग्रुप जोर लगा रहा है। हर विभाग में जाकर टीचर्स तक पहुंच की जा रही है। दोनों ही गुट टीचर्स की मांगों को पूरा करवाने के वादे कर रहे हैं।
वहीं, डॉ.शारदा ग्रुप ने एसोसिएशन चुनाव तय समय पर ही करवाने का भरोसा दिलवाया है। उनका दावा है कि किंगरा ग्रुप डेढ़ सालों से चुनाव करवाने में देरी कर रहा है, वो नहीं करेंगे। वहीं, डॉ. किंगरा ग्रुप ने टीचर्स को भरोसा दिया कि उनके सत्ता में आने पर वो एसोसिएशन चुनावों और एसोसिएशन में यूनिवर्सिटी प्रबंधन की दखलअंदाजी को बंद करवाएंगे। दोनों ग्रुपों में प्रधान पद के लिए डॉ. राकेश शारदा और डॉ. एचएस किंगरा का नाम ही सामने आ रहा है, लेकिन अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि दोनों ही गुटों के कोर ग्रुपों की मीटिंग के बाद ही की जाएगी।
टीचर्स की गरिमा को बनाए रखने को करेंगे काम : डॉ. शारदा
हमारा मुख्य मकसद है कि हम टीचर्स की गरिमा को बनाए रखना चाहते हैं। पिछले कुछ समय में काफी परेशानियां सामने आई हैं। सबसे बड़ा मुद्दा है कि हम अध्यापक एसोसिएशन के चुनाव समय पर करवाना चाहते हैं। वहीं, यूनिवर्सिटी के बाहर यानी आउटस्टेशन में काम कर रहे टीचर्स की समस्याओं का भी हल किया जाएगा। नई पेंशन स्कीम को खत्म करवाना, नए टीचर्स को पूरी तनख्वाह, उन्हें रहने की सुविधा मुफ्त, उनके प्रोबेशन पीरियड को अनुभव में गिनवाना, टीचर्स को पूरे पे-स्केल दिलवाना हमारे मुख्य मुद्दों में हैं। साथ ही टीचर्स की जो भी समस्याएं होंगी, उन्हें जल्द हल भी करवाएंगे।डॉ.राकेश शारदा
सत्ता में आए तो एसोसिएशन के कार्यकाल की मियाद करवाएंगे 2 साल: डॉ. सांघा
टीचर्स के कई मुद्दे हैं, जिनका हम हल करवाना चाहते हैं। इनमें टीचर्स की प्रमोशन समय पर करवाना, सिनियोरिटी के आधार पर विभागों में हेड चुने जाएं, पसंद के हिसाब से एक्सटेंशन न दी जाए, बल्कि एक ही नियम हो एक्सटेंशन का। इसके साथ ही हम इस बार सत्ता में आए तो एसोसिएशन के कार्यकाल की मियाद 2 साल की करवाएंगे। 1 साल का समय कम है। वहीं, टीचर्स को अपनी रिसर्च पब्लिकेशन करवाने की आजादी दिलवाना भी मुद्दा है। अभी सिर्फ कुछ ही जनरल में पब्लिकेशन करवाने की आजादी है। ऐसे में टीचर की रिसर्च कई बार पब्लिश नहीं हो पाती। -डॉ. केएस सांघा
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January 07, 2021 at 05:54AM
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