खाता न बही नंबरदार जिसकी तस्दीक कर दे वही सही, क्योंकि ये नंबरदार 1924 यानी अंग्रेजों के जमाने से रजिस्ट्री कार्यालय में जमीनों की होने वाली खरीद-फरोख्त की तस्दीक कर रहे हैं। शहर में इस समय अलग-अलग एरिया में करीब 900 नंबरदार तस्दीक के लिए लगे हैं। सरकार प्रत्येक नंबरदार को हर महीने 1500 रुपए मानभत्ता देती है।
हालांकि कुछ नंबरदार मनमाने तरीके से अपने एरिया के बाहर जाकर लोगों की तस्दीक कर रहे हैं यह सब रजिस्ट्री कार्यालय में तैनात अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है। फ्राड करने वाले करीब 35 नंबरदारों के मामले डीसी कोर्ट में 6 महीने से पेंडिंग हैं, वहीं अपने एरिया से बाहर तस्दीक करने और रिश्वत मांगने को लेकर जिला प्रशासन से शिकायत की हुई है। मामले में प्रशासन की ओर से जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं।
सोशल वर्कर भूपेश सुगंध और संदीप खोसला ने जिला प्रशासन से शहर के कुछ नंबरदार और उनके एरिया की जानकारी आरटीआई के माध्यम से मांगी थी। आरटीआई मिलने के बाद दोनों ने जिला प्रशासन को शिकायती पत्र देकर बताया कि एक इलाके का नंबरदार रजिस्ट्री के दौरान शहर के मखदूम पुरा, मास्टर तारा सिंह नगर सहित अन्य कई इलाकों के लोगों की तस्दीक कर रहा है, जोकि सरासर गलत है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री में तस्दीक के लिए नंबरदार ने उनसे 10 हजार रुपये की मांग की, रुपये नहीं देने पर तस्दीक नहीं की गई है, जिसके चलते रजिस्ट्री नहीं हो पाई। इस बाबत एडीसी जनरल जसवीर सिंह का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद जांच संबंधित सब रजिस्टर को सौंपी गई है।
नंबरदार यूनियन के प्रधान बोले- गलत तरीके से काम कर रहे नंबरदार पर हो कार्रवाई
तहसील-वन नंबरदार यूनियन के प्रधान बलविंदर सिंह बग्गा का कहना है कि एक नंबरदार के पिता जिस एरिया से नंबरदार थे, वह एरिया अब आर्मी में है। लेकिन फिर भी नंबरदारी कर रहा है। इसकी प्रशासन को जांच करानी चाहिए, कि जो एरिया ही आर्मी के पास है उसका नंबरदार कोई कैसे हो सकता है। दूसरा उक्त नंबरदार अधाकारियों के साथ मिलकर हर दिन अलग-अलग एरिया की होने वाली 30 से 35 रजिस्ट्री में लोगों की तस्दीक करता है, जो कि अवैध है। बलविंदर सिंह ने जिला प्रशासन से इसकी जांच कराने की मांग की है।
वहीं तहसील-टू नंबरदार यूनियन के प्रधान चंद्र कलेर का कहना है कि जिस एरिया का नंबरदार है उसी एरिया कि वह तस्दीक कर सकता है। उनका कहना है कि नंबरदार केवल जमीनों की खरीद-फरोख्त करने वाले लोगों की तस्दीक करता है ना कि जमीनों की। जमीनों की तस्दीक तहसील से संबंधित कर्मचारियों के द्वारा की जाती है। कलेर का कहना है कि यदि कोई नंबरदार गलत तरीके से काम कर रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
अंग्रेजों के नुमाइंदे बने नंबरदार, हाजिरी लगाने की कोई व्यवस्था नहीं
वास्तव में सन 1921 से पहले अंग्रेजों ने हर एक गांव में आम लोगों की पहचान करने और इनकी जानकारी देने के लिए अपने एक खासम-खास नुमाइंदे को रखा था। इसी नुमाइंदे के आधार पर गांव में होने वाली सभी प्रकार की गतिविधियां संचालित होती थी। धीरे-धीरे इनका राजनीतिकरण शुरू हो गया और 1924 में गांव की जातिगत आबादी के आधार पर नुमाइंदे रखे जाने लगे, जिन्हें नंबरदार के नाम से जाने जाना जाने लगा। तब से लेकर अब तक यह परंपरा चली आ रही है।
अभी भी ज्यादातर नंबरदार यही मानते हैं कि हम लोग सरकार और समाज के बीच की एक कड़ी है, जिसका निर्वाहन सभी नंबरदार को ईमानदारी से करना चाहिए। वर्तमान में जितने नंबरदार हैं, उनमें से नियमित तौर पर काम करने वाले गिने-चुने हैं। इसके बावजूद डीसी दफ्तर से न तो कभी इनकी प्रभावी जांच हुई और न ही मान-भत्ता रोका गया।
साल 2019 में जिलेभर के सभी नंबरदारों को डीसी दफ्तर से 3.40 करोड़ से अधिक का भत्ता जारी किया गया। हैरानी की बात तो यह है कि भत्ता देने से पहले कोई वेरीफिकेशन तक नहीं की जाती। जो लिस्ट बनी है, उसके आधार पर दफ्तर बैठे कर्मचारी खातों में पैसा ट्रांसफर करते जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि सरकार के द्वारा नंबरदारों को मानभत्ता तो दे दिया है, लेकिन इनकी हाजिरी लगाने की कोई व्यवस्था अभी तक नहीं हो सकी है।
ऐसे होती है जमीनों में हेराफेरी
जमीन व उसके मालिक की वेरीफिकेशन करने के लिए नंबरदार नियुक्त किए जाते हैं। रजिस्ट्री के लिए नंबरदार की गवाही जरूरी होती है। नंबरदार सीधे पटवारी व तहसील से जुड़े होते हैं। इलाके में नंबरदार सक्रिय है या नहीं, यह देखने का जिम्मा पटवारी का है। अगर नंबरदार अपने इलाके की प्रॉपर्टी पर गवाही नहीं डाल रहा या फिर उसकी जगह कोई दूसरा गवाही दे रहा है तो इसे चैक करने का काम रजिस्ट्री करते वक्त तहसील के स्टाफ व तहसीलदार का है। इसके बावजूद आपस में मिल-जुलकर पूरा खेल चल रहा है। जिला प्रशासन से रजिस्ट्री ऑफिस तक इस बारे में कोई पूछताछ करने वाला नहीं है।
कोरोना के चलते डीसी कोर्ट में लटके मामले... नंबरदार वही लोग बन रहते हैं जिनका संबंध पहले नंबरदार से ब्लड रिलेशन का होता है। कोर्ट में 35 से अधिक ऐसे मामले चल रहे हैं जिनमें आरोप लगाया लगा है कि लोग गलत तरीके से नंबरदार बन गए हैं या फिर यह ऐसे लोग हैं जिन्होंने जालसाजी करके रजिस्ट्री के दौरान खरीदने और बेचने वाले की तस्दीक कर दी है लेकिन कोरोना कॉल के चलते बीते मार्च महीने से इन मामलों की सुनवाई नहीं हो पाई है। जिसके चलते करीब 5 महीने से मामले पेंडिंग पड़े हैं।
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August 28, 2020 at 04:42AM
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