कथित स्कॉलरशिप घोटाले के मामले में केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल की टिप्पणियों को सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बेतुकी और राजनीति से प्रेरित बताया। कहा- हरसिमरत को हर मामले में सीबीआई से जांच की मांग की आदत पड़ चुकी है। वह एनडीए के राजसी आकाओं को खुश करने में लगी रहती हैं। उनको इस मामले में बोलने का अधिकार नहीं है और वह सिर्फ लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रही हैं।
आरएसएस नेता जगदीश गगनेजा कत्ल समेत 4 लक्षित हत्याओं में एक को भी सीबीआई हल नहीं कर पाई। अब भी सीबीआई केंद्र सरकार के इशारे पर बेअदबी मामलों में रुकावट की कोशिश कर रही है। वहीं, उनकी सरकार स्कॉलरशिप मामले की निष्पक्ष जांच को वचनबद्ध है और दोषी पाए गए व्यक्तियों के खिलाफ पद का लिहाज किए बिना कार्यवाही की जाएगी।
जांच सीएस को सौंपना ठीक नहीं : सांपला
पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय सांपला ने कहा कि हैरानी हो रही है कि स्कॉलरशिप घोटाले की जांच मुख्य सचिव को सौंपी गई है। इससे पता चला है कि सरकार मामले में गंभीर नहीं है। अगर सरकार दोषियों को सजा दिलाना चाहती है तो पहले मंत्री को बर्खास्त करें। फिर जांच सीबीआई या हाईकोर्ट के जज से कराए। इंसाफ न मिलने तक भाजपा आंदोलन करेगी।
मंत्री को क्लीनचिट देने की कवायद : शिअद
शिअद नेता एवं पूर्व मंत्री महेशइंदर सिंह ग्रेवाल ने कहा कि स्कॉलरशिप घोटाले की जांच मुख्य सचिव से कराना धर्मसोत को क्लीन चिट दिलाने की कवायद के अलावा कुछ नहीं है। सरकार धर्मसोत पर आपराधिक केस दर्ज करके बर्खास्त करे।
सीएस से जांच कराना महज ड्रामा: आप
विधानसभा में आप के नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा ने कहा के सरकार अपने मंत्री को बचाने में जुटी है। मुख्य सचिव से क्लीनचिट दिलाना चाहती है। मंत्री की मुख्य सचिव से कैसे निष्पक्ष जांच हो सकती है? ये सरकार का ड्रामा है। अगर सरकार मामले में गंभीर है तो सीबीआई से जांच कराए।
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August 31, 2020 at 05:20AM
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