(आशीष चौरसिया) अपने खून-पसीने से पंजाब को ‘अन्न का कटोरा’ की उपाधि दिलाने वाले सूबे के किसानों की मेहनत एक बार फिर रंग लाई है। लॉकडाउन में गरीबों के पेट भरने में हमारे किसानों की भूमिका अहम रही। एफसीआई (फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) के आंकड़ों के अनुसार लॉकडाउन में देशभर के गरीबों को नि:शुल्क अनाज बांटने की केंद्र की योजना के तहत कुल 16.94 लाख टन अनाज का वितरण हुआ।
इन अनाजों को पहुंचाने की जिम्मेदारी एफसीआई पर थी, जिसने सबसे ज्यादा 46 % अनाज यानी 7.79 लाख टन पंजाब के गोदामों से ट्रांसपोर्ट करवाया। पंजाब के बाद एफसीआई ने हरियाणा के गोदामों से 18 % तेलंगाना से 12 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ से 7% खाद्यान देश के विभिन्न राज्यों में पहुंचाया। उल्लेखनीय है कि 24 मार्च से 23 अप्रैल तक पूरे देश में कंपलीट लॉकडाउन था इसके बाद धीरे-धीरे अनलॉक की कवायद शुरू हो गई थी।
इस दौरान लोगों के सामने भुखमरी का संकट पैदा न हो जाए इसलिए केंद्र ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत अप्रैल-जून की अवधि के दौरान हर महीने गरीबों को पांच किलो अनाज मुफ्त देने की व्यवस्था की थी। किसी केंद्रीय अथवा राज्य पीडीएस योजना के तहत कवर नहीं होने वाले प्रवासी श्रमिकों को भी मई एवं जून में भी 5-5 किलो अनाज देने की घोषणा की थी, जिसे बाद में तीन महीने और बढ़ा दिया गया था।
हरियाणा से 18% और तेलंगाना से 12% अनाज भेजा गया
एफसीआई के आंकड़ों के अनुसार "लॉक डाउन शुरू होने के 12 दिनों के दौरान, एफसीआई ने प्रतिदिन औसतन 1.41 लाख टन अनाज वितरण के उद्देश्य से देश के विभिन्न राज्यों में पहुंचाया। इसमें बिहार (1.96 लाख टन), पश्चिम बंगाल (1.65 लाख टन) और कर्नाटक (1.57 लाख टन) के बाद अधिकतम खाद्यान्न उत्तर प्रदेश (2.07 लाख टन) ले जाया गया।
उल्लेखनीय है कि लॉकडाउन से पहले एफसीआई प्रतदिन 80 हजार टन अनाज ट्रांसपोर्ट करवाती थी। पहुंचाए गए इन अनाजों को सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राशन की दुकानों के माध्यम से सब्सिडी दर पर हर महीने 5 किलो अनाज देने के अलावा, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 8.10 करोड़ गरीब लोगों को अगले तीन महीनों के लिए 5 किलो चावल या गेहूं मुफ्त में प्रदान करने की घोषणा की है।
किसको कितना अनाज मिला
- 2.07 लाख टन अनाज यूपी को दिया गया
- 1.96 लाख टन अनाज बिहार में गया
- 1.65 लाख टन अनाज प. बंगाल ने लिया
6.75 लाख वैगन से खाद्य सामग्री डिलीवर की गई
गरीबों को अनाज की कमी न होने पाए इसके लिए एफसीआई की सबसे मददगार रेलवे साबित हुई। उपभोक्ता मामले व खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार भारतीय रेलवे ने 6.75 लाख वैगन की मदद से लॉकडाउन के दौरान पूरे देश में करीब 20 लाख टन से अधिक खाद्यान्न व जरूरी वस्तुओं को देश के विभिन्न राज्यों में ट्रांसपोर्ट किए।
इसमें 4.50 लाख वैगन से खाद्यान व आवश्यक सामाग्री जैसे नमक, चीनी, खाद्य तेल, कोयला और पेट्रोलियम उत्पाद, जबकि उर्वरक की 11,336 वैगन, कोयले की 12,4759 वैगन और पेट्रोलियम उत्पादों की 7,665 वैगन बाकी अन्य वस्तुओं के वैगन शामिल रहे। कोरोना के चलते देश भर में गेहूं और चावल की आपूर्ति बाधित न होने पाए इस उद्देश्य रेलवे ने 58 रूट पर 109 पार्सल ट्रेन संचालित करने का फैसला किया था।
सेंट्रल पूल में पंजाब का योगदान 38 प्रतिशत
सेंट्रल पूल के लिए 2020-21 सीजन में सरकारी एजेंसियों ने कुल 382.4 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) की खरीदी की, जो कि 2012-13 के दौरान प्राप्त 381.48 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) के पिछले रिकॉर्ड को पार कर गया है। मध्यप्रदेश ने इस बार पूरे देश में सबसे ज्यादा 129 लाख मी.टन गेंहू सरकारी एजेंसी को बेचा है वहीं पंजाब ने 127 लाख मीट्रिक टन गेहूं बेचा। इस हिसाब पंजाब इस बार सेंट्रल पूल में योगदान देने में दूसरे स्थान पर पहुंच गया। आम तौर पर पंजाब का योगदान 38 प्रतिशत रहता है।
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August 31, 2020 at 04:42AM
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