14 अगस्त को डीसी ऑफिस मोगा की छत पर खालिस्तानी झंडा लगाने और तिरंगे का अपमान करने के मामले में फरार चल रहे दाे युवकाें जसपाल सिंह और इंद्रजीत सिंह (रौली गांव, माेगा के निवासी) काे दिल्ली में गिरफ्तार कर लिया गया। मामले में तीसरे आरोपी आकाशदीप को पुलिस 20 अगस्त को ही गिरफ्तार कर चुकी है। दोनों आरोपी नेपाल के जरिये पाकिस्तान जाने की फिराक में थे। इनके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया था।
जसपाल मास्टरमाइंड है, जिसके पिता सब इंस्पेक्टर हैं। दिल्ली स्पेशल सेल ने दोनों को 29 अगस्त को जीटी रोड करनाल से पकड़ा। डीसीपी संदीप यादव ने बताया दोनों के खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स और सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) से जुड़े हैं। एसएसपी हरमनबीर सिंह के मुताबिक तीनों ने आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू से व्हाटसएप पर संपर्क करने के बाद रचकर अंजाम दिया था। पन्नू पर भी केस दर्ज कर लिया गया है। पंजाब से 20 सदस्यीय टीम दोनों को पंजाब लाने के लिए रवाना हो गई है।
अमेरिका में बैठे राणा ने देना था 2500 डॉलर इनाम
पूछताछ में इंद्रजीत ने बताया, 8 अगस्त को उसके चचेरे भाई जग्गा ने उसे यू-ट्यूब पर प्रतिबंधित चैनल एसएफजे को सुनने और वोट देेने को कहा। अमेरिका से राणा नाम ने उसे खालिस्तानी झंडा लहराने पर 2500 डॉलर इनाम देने को कहा था। जसपाल भी उसी गांव में इंटरनेट कैफे चलाता है। 11 अगस्त को इसकी साजिश रची गई। जसपाल और इंद्रजीत का झंडा लगाने आदि का वीडियाे बनाया था। घटना के बाद जसपाल और इंद्रजीत लुधियाना पहुंचे और वहां से आनंदपुर साहिब चले गए थे। वहां कुछ दिन छिपने के बाद दाेनाें आराेपी दिल्ली में जा छिपे।
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August 31, 2020 at 04:51AM
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