लॉकडाउन के बाद निगम को प्राॅपर्टी टैक्स और पानी-सीवरेज के बकाया बिल जमा होने से राहत तो मिली है लेकिन इसके बावजूद दोनों मद में निगम को 31 दिसंबर तक बीते साल के मुकाबले करीब 6 करोड़ का घाटा हुआ है। इसमें प्राॅपर्टी टैक्स से अब तक 20 करोड़ रुपए मिले हैं। बीते साल के मुकाबले 2 करोड़ रुपए तथा पानी के बिल से 11.50 करोड़ जमा हुए हैं, जो बीते साल से करीब 4 करोड़ रुपए कम है। इसका बड़ा कारण वित्तीय वर्ष 2020-21 के पहले चार महीने अर्थात अप्रैल से लेकर जुलाई तक निगम को पानी-सीवरेज के बिल और प्राॅपर्टी टैक्स से कोई कमाई नहीं हुई।
ऐसे में निगम ने नए साल में बकाया बिल और टैक्स की वसूली के लिए सख्ती शुरू कर दिया है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में निगम को प्रॉपर्टी टैक्स से कुल 28.50 करोड़ रुपए की आमदन हुई थी। जबकि पानी-सीवरेज के बिल से 24 करोड़ रुपए मिले थे। निगम के लिए मौजूदा साल में कमाई के इसी आंकड़े के बराबर राजस्व जुटाना बड़ी चुनौती होगी।
कोरोना में 4 माह बिल और टैक्स जमा कराने का काम ठप होने से हुआ लॉस
वाटर सप्लाई ब्रांच के सुपरिंटेंडेंट मनीष दुग्गल ने बताया कि कोरोना के कारण लोगों ने बिल जमा कराने का काम प्रभावित रहा तो कई लोगों ने इसकी आड़ में रेगुलर बिल भी जमा नहीं करवाए। इसलिए वसूली के लिए फ्लाइंग टीम बनाकर रोजाना एक जोन में जांच करने की योजना बनाई है। इससे प्रत्येक सप्ताह 20 से 25 लाख रुपए की वसूली हो रही है। पहले जारी किए गए नोटिस के बाद टीम को मौके पर जो बिल नहीं देगा, उसके सीवरेज कनेक्शन काटने की कार्रवाई हो रही है।
सेक्टर स्तर पर तैयार की जा रही डिफॉल्टरों की लिस्ट
प्राॅपर्टी टैक्स ब्रांच के सुपरिंटेंडेंट महीप सरीन ने बताया कि कोरोना के कारण टैक्स जमा कराने का काम प्रभावित रहा। इसके 4 माह काम ठप रहने के बावजूद रिकवरी बेहतर रही। पहली जनवरी से टैक्स पर 10 फीसदी की पेनल्टी भी शुरू हो गई है तो इसी सप्ताह से डिफाॅल्टरों की प्राॅपर्टी सील करने की कार्रवाई शुरू होगी। समूह इंस्पेक्टर इसके लिए सेक्टर स्तर पर डिफाॅल्टरों की लिस्ट तैयार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि नगर निगम की टीम अब सख्ती से डिफॉल्टरों से वसूली करेगी।
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January 05, 2021 at 05:00AM
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