यहां टाइगर सफारी में अब एक ही बाघिन चिराग बची है। दरअसल उसकी साथी बाघिन इंचरा की बीमारी के चलते मौत हो चुकी है। फिलहाल सफारी में नया बाघ या बाघिन आने का इंतजार है। बताते हैं कि जिला फॉरेस्ट अफसर नीरज कुमार गुप्ता इस बारे में पहले ही छत्तबीड़ को प्रस्ताव भेज चुके हैं। शायद वहां अभी कम उम्र के बाघ या बाघिन उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि जल्द ही इसका प्रबंध किया जाएगा, क्योंकि यहां टाइगर सफारी में अकेली बाघिन के रहते दर्शकों की संख्या में कमी आ सकती है।
15 साल से ज्यादा थी इंचरा की उम्र
बाघ-बाघिन की औसतन आयु 15 से 18 साल होती है। इंचरा की उम्र पंद्रह साल से ज्यादा होने के कारण वह कई महीने से बीमार चल रही थी। विभागीय डॉक्टर के साथ गडवासू की एक्सपर्ट टीम उसका इलाज कर रही थी। मौत के बाद कोविड सहित अन्य जांच में उसकी स्वाभाविक मौत होने की पुष्टि हुई थी। उसकी मौत के बाद सफारी में अब चिराग नाम की बाघिन अकेली बची है।
बर्ड फ्लू को लेकर भी अलर्ट
टाइगर सफारी के परिसर में ही बने पक्षियों के बाड़ों की भी लगातार निगरानी की जा रही है। दरअसल बर्ड फ्लू के खतरे को देखते हुए विभागीय डॉक्टरों व गडवासू के माहिरों ने भी इस बारे में दिशा निर्देश दिए हैं। हालांकि सफारी में प्रवासी पक्षी न होने के साथ सभी पक्षियों को पिंजड़ों में रखा गया है, इसलिए उनकी मॉनीट्रिंग आसानी से हो रही है। वैसे भी सफारी के क्षेत्र में कोई झील या तालाब न होने के कारण यहां प्रवासी पक्षी आते भी नहीं हैं।
ब्यूटीफिकेशन की योजना -कोरोना के चलते सफारी दर्शकों के लिए बंद हैं। ऐसे में विभागीय स्तर पर इसके ब्यूटीफिकेशन की योजना बनाई गई है। ताकि सफारी खुलने के बाद दर्शकों का इसके प्रति आकर्षण बढ़ सके।
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January 07, 2021 at 05:39AM
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