(प्रदीप शर्मा) अध्यापन में करियर बनाने को बीएड करने वाले विद्यार्थियों की टीचिंग प्रेक्टिस अब बीए कॉलेज प्रबंधकों की ओर से ही लगाई जाएगी। इसमें शिक्षा विभाग अथवा एससीईआरटी का कोई दखल नहीं रहेगा, इस संबंधी एफिलिएटेड बॉडी पंजाबी यूनिवर्सिटी की ओर से कॉलेजों को विद्यार्थियों की टीचिंग प्रेक्टिस अपने स्तर पर लगाने की लिखित में मंजूरी भी दे दी गई है।
वहीं कॉलेज प्रबंधक व शिक्षा विभाग टीपी को लेकर आमने-सामने हो गए हैं। बीएड शेड्यूल के मुताबिक तीसरे सेमेस्टर में अगस्त से दिसंबर तक टीचिंग प्रेक्टिस का प्रावधान है, लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते फिलहाल इसे चौथे सेमेस्टर में तब्दील कर दिया है और अब चौथे सेमेस्टर की पढ़ाई ऑनलाइन पैटर्न पर तीसरे सेमेस्टर में करवाई जा रही है। हालात सुधरने पर जनवरी के चौथे सेमेस्टर में टीचिंग प्रेक्टिस की उम्मीद है।
विद्यार्थियों की परेशानियों पर प्रबंधकों ने लिया फैसला : बीते साल एससीईआरटी की ओर से टीपी की सूची में विद्यार्थियों को 70 से 90 किलोमीटर दूर के गांव-शहरों के स्कूलों में ड्यूटियां लगा दी। छह महीने की टीपी के लिए ड्यूटी स्टेशन पर ठहरना अथवा आना-जाने पर भारी-भरकम खर्च विद्यार्थियों के लिए नई मुसीबत बना। कॉलेजों के एतराज जताने पर एससीईआरटी ने 5-5 कॉलेजों की च्वाइस का भी प्रावधान रखा और तीसरे चरण संबंधित डीईओ की ओर से कॉलेजों में टीपी लगाई गई। प्राइवेट बीएड कॉलेजों की ओर से टीपी में फर्जीवाड़ा की शिकायतें उजागर होने पर शिक्षा विभाग ने अध्यापन की गुणवत्ता बनाए रखने को टीचिंग प्रेक्टिस लगाने की जिम्मेदारी उठाई थी।
प्राइवेट बीएड कॉलेजों की ओर से अपने विद्यार्थी बढ़ाने के मकसद से टीपी में पूरी रियायत दी जाने लगी। विद्यार्थी अपनी टीपी के लिए पसंदीदा स्कूलों का चुनाव करते और बिना कोई टीचिंग प्रेक्टिस किए सर्टिफिकेट जारी करवाने का ट्रेंड बढ़ा। इन पर अंकुश लगाने को कुछ साल से एससीईआरटी (स्टेट कौंसिल आफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग) की ओर से टीचिंग प्रेक्टिस स्कूलों में स्टाफ की खाली सीटों के अनुपात में लगाई जाती है।
एससीईआरटी नहीं कर सकता दखल : जगजीत सिंह
कॉलेज प्रबंधकों का तर्क है कि टीपी के लिए एससीईआरटी दखल नहीं कर सकता जबकि शिक्षा विभाग टीपी के लिए कॉलेजों को स्वतंत्र प्रभार सौंपने के पक्ष में नहीं है। फेडरेशन आफ सेल्फ फाइनांस्ड कॉलेज आफ एजुकेशन के प्रधान जगजीत सिंह का कहना है कि इस संबंध में जानकारी देने पर पंजाबी यूनिवर्सिटी ने कॉलेजों को अपने स्तर पर टीपी लगाने की मंजूरी दे दी है।
वहीं डायरेक्टर एससीईआरटी को आगाह कर दिया है। वैसे भी उनकी एफिलिएटेड बॉडी पंजाबी यूनिवर्सिटी है जबकि रेगुलेटरी बॉडी एनसीटीई है जिनके प्रति बीएड कॉलेज जवाबदेह हैं। बीएड कॉलेज एससीईआरटी के अधीन नहीं आते, ऐसे में विद्यार्थियों की टीपी लगाने में कोई दखल नहीं होना चाहिए। जगजीत सिंह ने सुझाव दिया कि एससीईआरटी की ओर से यूनिवर्सिटी व कॉलेजों को टीपी के लिए स्कूलों की लिस्ट देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ईटीटी करने वाले विद्यार्थियों पर सरकारी स्कूलों के लिए विद्यार्थियों के दाखिल करवाने की शर्त थोपी गई।
कॉलेज मर्जी से नहीं लगा सकते टीपी : डिप्टी डीईओ
डिप्टी डीईओ एलिमेंटरी बलजीत सिंह संदोहा का कहना है कि बीएड कर रहे विद्यार्थियों को अध्यापन के स्किल देना में मदद करना शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है। कॉलेज अपनी मर्जी से बीएड या ईटीटी के विद्यार्थियों की टीपी नहीं लगा सकते। शिक्षा विभाग ही सरकारी स्कूलों में खाली पोस्टों पर बीएड विद्यार्थियों को प्रेक्टिस करने का मौका देता है, अनुभवी क्लास टीचर की मौजूदगी में बीएड विद्यार्थी अपने अध्यापन की प्रेक्टिस करने का फायदा भी है।
स्कूलों में लाजिमी तौर पर बीएड विद्यार्थी की उपस्थिति को सुनिश्चित बनाने को रजिस्टर पर बाकायदा हाजिरी लगती है और इसकी बाकायदा चेकिंग भी होती है। विद्यार्थी टीपी लगाना नहीं चाहते और अक्सर ऐसे कॉलेजों को तरजीह देते हैं जोकि उन्हें कॉलेज में आए बिना और टीपी लगाए बिना बीएड का सर्टिफिकेट दे। विद्यार्थियों को ऐसी सुविधा देने के लिए ही कॉलेज अब अपने स्तर पर टीचिंग प्रेक्टिस लगाने के प्रयासों में है।
विद्यार्थी के साथ अध्यापक भी डमी, बायोमैट्रिक अटेंडेंस में भी हेरफेर, कॉलेजों ने कार्ड स्वाइप मशीन लगाई
राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की ओर से प्राइवेट बीएड कॉलेजों में विद्यार्थियों व अध्यापकों की हाजिरी को सुनिश्चित बनाने को बायोमैट्रिक अटेंडेंस के नियम में भी प्राइवेट कॉलेजों ने खूब हेरफेर की। ऐसे बीएड कॉलेजों ने आधार कार्ड लिंक्ड थंब इम्प्रेशन बायोमैट्रिक की बजाए कार्ड स्वाइप मशीन लगाई है। बीएड में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों के नाम पर कार्ड बनाकर कॉलेज प्रबंधक खुद ही कार्ड को मशीन से स्कैन करवाकर हाजिरी लगा रहे हैं। ऐसा ही सिस्टम अध्यापकों के नाम पर भी किया जा रहा है क्योंकि अनेक बीएड कॉलेजों में अध्यापक की पोस्टें तक खाली हैं।
बीएड कॉलेजों की रेगुलेटरी बॉडी एनसीटीई ने सेशन 2019-21 के शुरुआत में ही बीएड कॉलेजों में बायोमैट्रिक मशीन से उपस्थिति लाजिमी कर दी, इसके बावजूद भी जिले के अनेक कॉलेजों में बीएड के विद्यार्थियों की डमी एडमिशन है। कागजों में बीएड कर रहे विद्यार्थी नॉन अटेंडिंग क्लासें लगाते हैं यानी वे कॉलेज नहीं आते और उनकी हाजिरी अपने आप लग जाती है। शहर के बाहरी इलाकों में ऐसे भी कॉलेज हैं जहां अध्यापक तक नहीं रखे गए, उनकी सेवाएं फर्जी तौर पर दिखाई गई हैं।
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August 24, 2020 at 04:40AM
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