(रागिनी कौशल) आम लोगों को मार्केट से कम दाम में और बेहतर टेस्ट की सुविधाएं मिल सकें। इसके लिए सरबत दा भला एनजीओ द्वारा सूबे समेत विभिन्न राज्यों में 60 लैब्स तैयार की जा रही हैं। जहां पर मार्केट से भी 75-80 फीसदी कम रेट पर उन्हें टेस्ट की सुविधा मिल रही है। सूबे भर में 17 लैब्स चल चुकी हैं। लुधियाना में खुलने वाली लैब 18वीं लैब होगी। सरबत दा भला एनजीओ के चेयरमैन डॉ. एसपी सिंह ओबराय ने बताया कि पंजाब में 30 लैब्स बनाई जानी हैं। राजस्थान में 8, हरियाणा में 6, हिमाचल प्रदेश में 6, दिल्ली व नोएडा में भी लैब्स बनाई जानी हैं।
इन लैब्स को स्थापित करने का मुख्य मकसद यही है कि आम लोगों को अच्छी सुविधा दी जा सके। लेकिन उनके लिए उन्हें महंगे दाम भी न चुकाने पड़ें। लुधियाना में हेरां गांव में एक लैब चल रही है। दूसरी लैब पुलिस लाइंस में स्थापित करेंगे। जहां पर कोई भी जाकर जांच करवा सकता है। जिला प्रधान जसवंत छापा ने बताया कि ये लैब सभी लैब्स से अलग है। यहां पर अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी उपलब्ध होगी। आम लैब वाले 20-25 रुपये वाले टेस्ट के 300-350 रुपये आम लोगों से लेते हैं।
इस साल के अंत तक आठ और लैब्स बनाई जाएंगी
डॉ. ओबराय ने बताया कि लुधियाना के पुलिस लाइंस में बनने वाली लैब की बिल्डिंग कुछ रिपेयर हो रही है। हमने मशीनरी ऑर्डर कर दी है। जल्द ही स्टाफ भी नियुक्त कर लिया जाएगा। जिसके बाद कोई भी वहां पर जाकर जांच करवा सकता है। ये लैब नो प्रॉफिट नो लॉस पर आधारित है। प्राइवेट लैब में मशीनरी, डॉक्टर की कमीशन, लैब का प्रॉफिट मिला कर रेट बहुत बढ़ा दिया जाता है। कई बार ज़रुरतमंद लोग इसी डर से टेस्ट नहीं करवाते कि टेस्ट महंगे हैं और बीमारी बेहद बढ़ जाती है। लोग ऐसा न सोचें और समय पर जांच करवा लें इसी को देखते हुए ये लैब शुरु की गई है। इस साल के अंत तक 8 और लैब्स बनाई जाएंगी।
डायलिसिस 750 रुपए में होगी
डॉ. ओबराय ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले गरीब लोगों के लिए आंखों के ऑपरेशन करवाने की शुरुआत की थी। अब तक 39000 ऑपरेशन हो चुके हैं। उसके बाद हॉस्पिटल्स में 3 हजार से 5000 का होने वाला किडनी डायलिसिस 450-550 रुपये में उपलब्ध करवाया। आम व्यक्ति को डायलिसिस के लिए जो महीने में जितने पैसे खर्चने पड़ते हैं उतने में हम साल में डायलिसिस करवा देते हैं। पंजाब में 108 यूनिट लगाए गए हैं। इसमें 23 गवर्नमेंट हॉस्पिटल भी हैं। लुधियाना के पंचम हॉस्पिटल में दो यूनिट लगाए हैं। जहां पर एचआईवी के मरीजों के लिए डायलिसिस की मशीन नहीं थी। मरीजों को एक डायलिसिस के लिए 5000-6000 का खर्चा उठाना पड़ता था। इसे हम 750 रुपये में करवा रहे हैं। इन क्षेत्रों में जब काम किया जो हमने पाया कि लोग समय पर टेस्ट नहीं करवाते इसलिए समस्या बढ़ती है। इसे ही देखते हुए हमने लैब की शुरुआत की है।
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September 28, 2020 at 05:20AM
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