ईएसआई अस्पताल में पिछले 4 महीने से 21 साल की एक युवती उपचाराधीन है। 14 अप्रैल को युवती को पुलिस अस्पताल में दाखिल करके गई थी। शुरुआत में सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने युवती का इलाज किया। इसके बाद ईएसआई अस्पताल की दूसरी मंजिल पर युवती को दाखिल किया गया है। अब इलाज पूरा हो चुका है लेकिन कोई संस्थान उसे रखने के लिए हामी नहीं भर रहा।
ईएसआई अस्पताल की एमएस डॉ. लवलीन गर्ग ने बताया कि युवती की दिमागी हालात ठीक नहीं है। अस्पताल की तरफ से थाना-4 के एसएचओ और डीसी को कई बार युवती को पिंगला घर या नारी निकेतन मे शिफ्ट करने के लिए भी कहा गया है लेकिन 2 महीने से थाना और जिला प्रशासन की तरफ से कोई एक्शन नहीं लिया गया। इस बारे एसएचओ रशपाल सिंह का कहना है कि इस बारे कोई जानकारी नहीं है। अगर अस्पताल लिखकर देता है तो वे युवती की मदद जरूर करेंगे।
ईएसआई अस्पताल की नर्सें इंसानियत की मिसाल कायम कर रहीं
युवती को अस्पताल में दाखिल हुए 4 महीने हो चुके हैं लेकिन किसी भी व्यक्ति विशेष और प्रशासन की तरफ से कोई पहल नहीं की गई कि युवती को किसी सरकारी संस्थान में भेजा जा सकेे। अस्पताल की नर्सों का कहना है कि वे 4 माह से युवती के लिए घर से कपड़े ला रही हैं। वे ही उसे नहलाती हैं और देखभाल करती हैं। कुछ नर्सें उसके लिए घर से रोज खाना भी लाती हैं।
ईएसआई अस्पताल में सिविल शिफ्ट...कोरोना के इलाज के चलते सिविल अस्पताल के डॉक्टरों को ईएसआई में शिफ्ट किया गया है। युवती जैसे कई ऐसे मरीज हैं, जो अस्पताल में भटक रहे हैं। जिन मरीजों की पहचान नहीं होती या प्रशासन के पास परिजनों का पता नहीं होता, उन्हें इलाज के लिए सिविल में दाखिल किया जाता है लेकिन इलाज के बाद कोई बात नहीं पूछता।
- अस्पताल में न तो सीसीटीवी कैमरा है और न ही पर्याप्त सुरक्षाकर्मी हैं। इस कारण उन्हें यह ही डर सताता रहता है कि अगर युवती के साथ रात के समय कोई अप्रिय घटना हो गई तो उसका कौन जिम्मेदार होगा। इसी के चलते वे कई बार थाना-4 और जिला प्रशासन के सामने इस मामले को रख चुके हैं लेकिन कोई हल नहीं हुआ। -डॉ. गर्ग, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट ईएसआई
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September 01, 2020 at 04:29AM
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