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Sunday, April 26, 2020

कंट्रोल रूम से गायब 22 कर्मियों को शोकॉज, वेतन पर भी रोक

उपायुक्त शशि रंजन ने कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव एवं रोकथाम के लिए गठित जिला नियंत्रण कक्ष में प्रतिनियुक्त 22 कर्मियों को अपनी ड्यूटी के साथ लापरवाही बरतने के आरोप में शाे काॅज जारी किया है। साथ ही उपायुक्त ने उनका वेतन अगले आदेश तक के लिए स्थगित रखने का भी आदेश दिया है। इस संबंध में जारी पत्र में उपायुक्त ने कहा है कि कोरोना वायरस एक विश्व व्यापी महामारी है। उसको लेकर सरकार के निर्देश के आलोक में जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गई है। जिसमें तीन पारियों में कर्मियों की प्रतिनियुक्ति की गई है। जिला नियंत्रण कक्ष के वरीय पदाधिकारी अपर समाहर्ता सुधीर कुमार गुप्ता ने निरीक्षण के क्रम में उपरोक्त कर्मियों को अपने कार्य से अनुपस्थित पाया।
अपर समाहर्ता की अनुशंसा के आलोक में उपायुक्त ने सभी कर्मियों से स्पष्टीकरण की मांग करते हुए कहा है कि उनका यह कृत्य सरकारी सेवक के लिए निर्धारित आचार नियमावली के विरुद्ध है तथा यह आपदा प्रबंधन नियमावली के नियम के भी खिलाफ है। जिला नियंत्रण कक्ष में विभिन्न तिथियों को प्रतिनियुक्त जिन कर्मियों से स्पष्टीकरण की मांग की गई है उनमें नगर परिषद के कनीय अभियंता अंजिता लकड़ा, जल पथ प्रमंडल के कनीय अभियंता नीरज जॉर्ज खलखो गुमला प्रखंड कार्यालय के मन्ना साहू, लिपिक जैन सुनीता कुजुर, राजेंद्र ओहदार, अभिषेक विवेक, प्रदीप बड़ाईक, नरेंद्र साहू, मुनेंद्र चीक बड़ाईक, अखिलेश कुमार सिन्हा, अनुसेवक योगेन्द्र उराँव, छोटू राम, महावीर प्रमाणिक, नागेश्वर राम, गंगाधर सिंह, राम रतन नायक, फूलचंद उराँव, तैसा बड़ा, रतिया उराँव, सावना उराँव, प्रकाश उरांव और बाजार समिति के पर्यवेक्षक उर्मिला कुमारी का नाम शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि जिला नियंत्रण कक्ष के वरीय पदाधिकारी सह अपर समाहर्ता सुधीर कुमार गुप्ता अलग-अलग तिथि में औचक रुप से जिला नियंत्रण कक्ष का निरीक्षण किया जिसमें उपरोक्त कर्मी अनुपस्थित पाए गए तत्पश्चात उनके खिलाफ अग्रेतर कार्रवाई की गई।

इधर... लॉकडाउन का उल्लंघन करनेवालाें पर केस नहीं करने पर घाघरा सीओ काे शाेकाॅज

उपायुक्त शशि रंजन ने लॉकडाउन का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं करने तथा क्वारेंटाइन सेंटर में रहने वाले लोगों को उनके गंतव्य तक भेजने के लिए वाहन व्यवस्था नहीं करने पर घाघरा के सीओ दिनेश प्रसाद गुप्ता से 3 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा है। सीओ से पूछे गए स्पष्टीकरण में उपायुक्त ने उल्लेख किया है कि वैश्विक महामारी कोविड-19 के आलोक में सभी पदाधिकारियों एवं कर्मियों को मुख्यालय में अवस्थित होकर सरकारी कार्य करने का आदेश दिया गया है। देश में लागू लॉक डाउन का पालन करते हुए घर से बाहर निकलने एवं अनावश्यक रूप से सड़कों पर घूमने वाले लोगों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है तथा इसका उल्लंघन करने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। इसके तहत बाहर से आने वाले व्यक्तियों को क्वारेंटाइन करने तथा उनके लिए अलग से आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था। जिसमें घाघरा प्रखंड अंतर्गत भी क्वारेंटाइन सेंटर में आने वाले व्यक्तियों को आइसोलेशन में रखा गया है।
इस संबंध में उपायुक्त ने प्राप्त सूचना के आलोक में उल्लेख किया है कि अंचलाधिकारी घाघरा प्रतिदिन संध्या में मुख्यालय से बाहर चले जाते हैं। साथ ही कोविड-19 के प्रचार प्रसार की रोकथाम के लिए प्रतिदिन वाहन की सघन जांच करने के क्रम में काफी संख्या में वाहनों को जब्त किया गया किंतु उनके वाहन मालिकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। निर्देश के बाद भी वाहन मालिकों के खिलाफ लॉक डाउन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं करने को लेकर सीओ से स्पष्टीकरण पूछा है।
साथ ही उपायुक्त ने यह भी कहा है कि 19 अप्रैल को आइसोलेशन केंद्र में क्वारेंटाइन अवधि पूर्ण कर चुके लोगों को उनके गंतव्य तक भेजने के लिए उनके द्वारा वाहन की कोई व्यवस्था नहीं करते हुए सभी लोगों को पैदल ही अपने गंतव्य तक जाने का आदेश दिया गया। यह कार्य उनके असंवेदनशील रवैया को प्रदर्शित करता है। अंचलाधिकारी का कार्य सरकारी सेवक के लिए निर्धारित आचार नियमावली तथा आपदा प्रबंधन नियमावली के खिलाफ है।



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22 personnel missing from control room, condolence on salary

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April 26, 2020 at 05:00AM

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