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Monday, October 26, 2020

सॉलिड वेस्ट और खुले में कूड़ा खत्म करने के लिए करोड़ों के प्रोजेक्ट शुरू किए, लापरवाही के कारण ठप

निगम ने सिटी में सॉलिड वेस्ट से लेकर सड़क पर कूड़े के ढेर को खत्म करने के लिए बीते सालों में कई प्रोजेक्ट शुरू किए, लेकिन लच्चर योजना और कोई निगरानी नहीं होने के कारण करोड़ों रुपए की लागत वाले प्रोजेक्ट ठप हो गए और इसे दोबारा पटरी पर लाने के लिए निगम ने कोई प्रयास भी नहीं किया।

सालाना लोगों के टैक्स का करोड़ों रुपये बर्बाद हो रहा है, लेकिन निगम अफसरों से लेकर जनप्रतिनिधियों को इसकी परवाह तक नहीं है। इसके चक्कर में करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद समस्या जस की तस खड़ी है और लोग परेशानी झेल रहे हैं।

सिर्फ सॉलिड वेस्ट की समस्या दूर करने वाले प्रोजेक्ट की बात की जाए, तो गीले कूड़े से खाद बनाने के लिए नंगलशामा में 40 लाख रुपये की लागत से बनाए गए 33 पिट का काम एक साल से ठप है।

पिट में आने वाला कूड़ा सड़क किनारे बने डंप पर फेंका जा रहा

पिट पर शेड डालने का काम भी अधूरा पड़ा है। कारण पिट बनाने का विरोध कर रहे निगम प्रशासन ने साथ लगती सोसायटी के एतराज पर सुनवाई नहीं की और हाईकोर्ट में केस के कारण पिट का काम ठप है। इसके चक्कर में एक साल से पिट में आने वाला कूड़ा सड़क किनारे बने डंप पर फेंका जा रहा है।

निगम के हेल्थ अफसर डॉ. श्री कृष्ण शर्मा का कहना है कि मार्च के बाद कोरोना के कारण हाईकोर्ट में सुनवाई लंबित है। वकील से कहा गया है कि वो सुनवाई के लिए आवेदन दें, उम्मीद है पहली सुनवाई में अब पिट शुरू करने की इजाजत मिल जाएगी।

25 लाख से रोड किनारे लगाए थे डस्टबिन, आधे गायब, बाकी कबाड़

पूर्व मेयर सुनील ज्योति के कार्यकाल में निगम ने मेन रोड और मार्केट में सड़कों पर कूड़ा खत्म करने को लेकर 25 लाख रुपए की लागत से रोड साइट पर 500 डस्टबिन लगाए थे। इसमें स्टैंड भी लगा था, ताकि कूड़ा सड़क पर न आ पाए, लेकिन 3 साल में आधे डस्टबिन गायब हो गए और जो बचे हैं उसमें से 30 से 40 फीसदी मेंटनेंस न होने के कारण कबाड़ हो चुके हैं।

कई जगहों पर तो लोगों ने अपनी दुकान के सामने लगे डंप चुपके से तोड़फोड़ कर फेंक दिए, तो कई जगहों पर रात को अंधेरे में नशेड़ियों ने लोहे के स्टैंड चोरी कर बेच दिए। निगम के हेल्थ एंड सेनिटेशन एडहॉक कमेटी के चेयरमैन पार्षद बलराज ठाकुर का कहना है कि इस बिन को फिर से काम में लाया जा सकता है। हेल्थ ब्रांच से इसके लोकेशन की डिटेल ली जाएगी और जो मौके पर टूटे पड़े हैं, उसे काम में लाकर भी काफी समस्या दूर की जा सकती है।

18 लाख से प्रतापबाग में बना डंप लेकिन कूड़ा सड़कों पर

6 साल पहले निगम ने दक्षिण भारत के शहरों की तर्ज पर खुले में बने डंप को कवर करने के लिए ग्रीन मॉडल डंप बनाया था। 18 लाख रुपए की लागत से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में प्रताप बाग में ग्रीन डंप बनाया गया, लेकिन अब डंप से ज्यादा सड़क पर ढेर लगता है। कारण बताया गया कि यहां कूड़ा फेंकने और उठाने के लिए ट्रक और डिच मशीन के निकलने का रास्ता नहीं नहीं है।

विदेश में कामयाब अंडरग्राउंड डंप यहां फेल

यूरोपीय देशों में खुले में कूड़ा नहीं दिखने के लिए अंडरग्राउंड डंप का प्रोजेक्ट कामयाब है। इसी के तर्ज पर प्रयोग के लिए पूर्व मेयर सुनील ज्योति के समय में विकासपुरी और शहीद ऊधम सिंह नगर में अंडरग्राउंड बिन वाला डंप बनाने पर करीब 8 लाख रुपये खर्च किया गया था।

लेकिन निगम के पास कंपेक्टर और बिन में लगे बड़े पॉलिथीन को बदलने का इंतजाम नहीं होने के कारण प्रोजेक्ट फेल हो गया। चार साल तक बिन की बजाय सड़कों पर कूड़े का ढेर लगता था और 6 माह पहले इसे खत्म कर दिया गया। उसकी जगह कूड़ा प्रोसेस की मशीन नहीं लगने के कारण सड़क पर डंप चल रहा है।



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नंगलशामा में बने पिट पर गीले कूड़े से खाद बनाने का ठप पड़ा काम और अधूरा पड़ा शेड लगाने का काम।

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October 26, 2020 at 05:17AM

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