शहरी और ग्रामीण एरिया में प्राॅपर्टी की खरीद-फरोख्त होने के बाद दस्तावेजों को दुरुस्त करने के लिए हर 5 साल में जमाबंदी होती है। सभी पटवारियों को अपने क्षेत्र के अनुसार दस्तावेजों की रिपोर्ट तैयार करकेे रेवेन्यू विभाग को देनी होती है। इसके बाद रेवन्यू विभाग इसका मिलान करके ऑनलाइन करता है। इस साल कोरोना महामारी के चलते दस्तावेजों दुरुस्त करने के लिए सरकार की ओर से राजस्व कर्मियों को 31 जनवरी तक का समय दे दिया गया है। अभी तक इन दस्तावेजों को ठीक करने के लिए 30 दिसंबर तक का समय दिया गया था। मगर हालात यह हैं कि ग्रामीण क्षेत्र में जमाबंदी का काम पूरा हो चुका है, जबकि शहर
के 5 सर्किलों के करीब 1.50 लाख दस्तावेजों की जमाबंदी नहीं हो पा रही है। राजस्वकर्मी इसकी वजह शहर की बेशकीमती जमीनों के खसरा नंबरों की अदला-बदली बता रहे हैं। उनका कहना है कि सिटी के इलाके ऐसे हैं, जहां पर एक खसरा नंबर पर दाे या फिर तीन अलग-अलग नाम दर्ज हैं। जिन प्रॉपर्टी में कमियां आ रहीं हैं, उन्हें नए साल में नोटिस भेजकर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पंजाब सरकार के नए आदेश के अनुसार जमाबंदी और जमीनी संबंधी सभी दस्तावेज निर्धारित 30 दिनों में लैंड रिकॉर्ड रूम में जमा करवाना सुनिश्चित करवाया जाए। सरकार का मानना है कि पहले कोरोना महामारी और फिर किसान आंदोलन के कारण रेवेन्यू से संबंधित कई कामकाज प्रभावित हुए हैं, जिसे देखते हुए सरकार कामों को जल्द निपटाने के लिए अतिरिक्त समय देकर राहत दे रही है। इस दौरान सभी पटवारियों को राजस्व रिकॉर्ड तैयार करके देना है। इस बाबत एडीसी जसबीर सिंह का कहना है कि ग्रामीण एरिया में राजस्व पूरे करके ऑनलाइन कर दिए गए हैं, जबकि शहरी एरिया में कुछ जगहों पर दिक्कत आ रही है। इसे जल्द दुरुस्त करने के लिए कहा गया है।
ऐसे होती हैं रजिस्ट्रियां...आम दिनों में रजिस्ट्री कार्यालय में हर दिन औसतन 180 रजिस्ट्रियां होती हैं। हर माह 5400 और साल में कुल 64,800 जमीनों की खरीद-फरोख्त होती है। ऐसे में 15 साल से जमाबंदी नहीं होने से करीब 9.50 लाख जमीनों के दस्तावेज दुरुस्त नहीं हैं यानी अभिलेखों में जमीनों के क्रेता और विक्रेता दोनों के नाम अंकित है, जबकि 5 साल बाद सिर्फ जमीन खरीदने वाले का काम होना चाहिए।
ऐसे समझिए जमाबंदी...किसी भी प्रॉपर्टी की खरीद और बिक्री होने पर इंतकाल चढ़ाया जाता है यानी जमाबंदी होने पर बेचने वाली की जगह जमीन के दस्तावेजों पर खरीदार का नाम अंकित हो जाता है। जमाबंदी नहीं होने से दस्तावेजों में क्रेता और विक्रेता दोनों के नाम अंकित हैं। जमीन मालिक खसरा नंबर में खेल कर रहे हैं। खसरा नंबरों की अदला-बदली का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। इसमें सबसे अधिक संलिप्तता पटवारी की होती है। लोग आसपास के खाली एरिया, यहां तक कि सड़कों और पार्कों तक के खसरे नंबर पर रजिस्ट्री करवा रहे हैं। ऐसे में रजिस्ट्री करवाने वाला, करने वाला और वसीका लिखने वाला तीनों खामोश रहते हैं, इसलिए शिकायत भी नहीं होती।
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December 29, 2020 at 04:38AM
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