200 साल पुराने शिव मंदिर पहाड़ीवाला बस्ती शेख में बने तालाब के नवनिर्माण का काम शुरू किया गया है। मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए करीब 20 दिन पहले शुरू हुए इस काम में सेवादार बढ़-चढ़कर सहयोग कर रहे हैं। ट्रस्ट के सदस्य सोनू चौहान (राजकुमार) ने बताया कि मंदिर में बने तालाब को एक नया रूप देने के लिए काम जोरो-शोरों से चल रहा है। इस मंदिर को श्री सिद्ध पीठ देवी तालाब मंदिर की तरह ही बनाया
जाएगा। तालाब तैयार होने के बाद भगवान शिव की मूर्ति को विराजमान किया जाएगा और आसपास बगीचा बनाया जाएगा। मंदिर की तालाब के नवनिर्माण का कार्य लोगों के सहयोग से ही किया जा रहा है। सेवादार पवन लूथर और वेद प्रकाश प्रकाश ने बताया कि मंदिर को लोग लाल पहाड़ी के नाम से भी जानते है। क्योंकि पुराने समय में मंदिर के साथ पहाड़ी हुआ करती थी जोकि आज भी मौजूद है। मंदिर में 10 साल पहले
आंवला का वृक्ष लगाया गया था, जोकि विशाल वृक्ष का रूप धारण कर चुका है। आने वाले दिनों में मंदिर में आंवला पूजन भी करवाया जाएगा। यहां सुरिंदर मोहन, विजय सहदेव, रोशन लाल जुल्का, सुशील शर्मा, मोहन लाल शूर, नरेश सोनी, सुभाष कपूर, प्रदीप आदि मौजूद थे।
नानकशाही ईंटों से बनी हैं दीवारें, जिन पर पुरातन चित्रकारी
जानकारी के अनुसार 200 साल पहले ऋषि मुनि मंदिर के प्रांगण में बैठकर तप किया करते थे। फिर धीरे-धीरे आसपास के लोग यहां आकर पूजा-पाठ करने लगे और मंदिर में उनकी आस्था बढ़ती गई। शिवरात्रि पर मेला लगना शुरू हो गया। सोनू चौहान ने बताया कि सूरी परिवार के बुजुर्गों ने मंदिर के लिए जमीन दान दी थी। मंदिर की दीवारें नानकशाही ईंटों से बनी हैं। मंदिर में तीन संतों सीता राम, 108 महामंडलेश्वर बाबा रतन नाथ, गंडा राम की समाधि आज भी है। वहीं मंदिर में बने तालाब की दीवारों पर पुराने समय की चित्रकारी है जिसपर देवी-देवताओं को चित्र बने हुए हैं। इनमें बनी शिव भगवान की मूर्ति बेहद पुरानी है जिसके बाद ही सबने तालाब में शिव भगवान की मूर्ति स्थापित करने का फैसला लिया है।
मंदिर की व्यायामशाला में कसरत करते हैं लोग.. इस मंदिर में भोले शंकर, हनुमान जी, माता चिंतपूर्णी, मां अन्नपूर्णा, शनि देव की मूर्ति विराजमान है। इनमें सबसे पुराना शिवालय है। मंदिर में व्यायामशाला भी है, जहां पर लोग सुबह शरीर को सेहतमंद रखने के लिए कसरत करने आते हैं। पावर लिफ्टिंग खिलाड़ी सोनू चौहान बताते हैं कि जब 4-5 साल के थे, तब से पिता के साथ मंदिर में कसरत करने आते हैं। धीरे-धीरे व्यायामशाला में रूचि बढ़ी तो यहां होने वाले मुकाबलों में हिस्सा लेने लगा। 2019 में जापान में पावर लिफ्टिंग मुकाबले में हिस्सा ले चुके हैं।
नानकशाही ईंटों से बनी हैं दीवारें, जिन पर पुरातन चित्रकारी जानकारी के अनुसार 200 साल पहले ऋषि मुनि मंदिर के प्रांगण में बैठकर तप किया करते थे। फिर धीरे-धीरे आसपास के लोग यहां अाकर पूजा-पाठ करने लगे और मंदिर में उनकी आस्था बढ़ती गई। शिवरात्रि पर मेला लगना शुरू हो गया। सोनू चौहान ने बताया कि सूरी परिवार के बुजुर्गों ने मंदिर के लिए जमीन दान दी थी। मंदिर की दीवारें नानकशाही ईंटों से बनी हैं। मंदिर में तीन संतों सीता राम, 108 महामंडलेश्वर बाबा रतन नाथ, गंडा राम की समाधि अाज भी है। वहीं मंदिर में बने तालाब की दीवारों पर पुराने समय की चित्रकारी है जिसपर देवी-देवताओं को चित्र बने हुए हैं। इनमें बनी शिव भगवान की मूर्ति बेहद पुरानी है जिसके बाद ही सबने तालाब में शिव भगवान की मूर्ति स्थापित करने का फैसला लिया है।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
https://ift.tt/2WTJjdE
December 29, 2020 at 04:43AM
No comments:
Post a Comment