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Wednesday, December 30, 2020

एंट्री से ऑब्जर्वेशन रूम तक पहुंचने में हर लाभार्थी को लगे 6 मिनट, असल में 36 मिनट की होगी पूरी प्रक्रिया

सिविल अस्पताल में मंगलवार को कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर मॉक ड्रिल की गई। सेहत महकमे की प्लानिंग के मुताबिक सुबह 8.15 बजे काम शुरू होना था, लेकिन स्टाफ देरी से पहुंचने पर सुबह 9.10 बजे के बाद ही यह शुरू हो सका। वहीं, लाभार्थियों को 9.30 बजे पहुंचने का मैसेज भेजा था, लेकिन पहला लाभार्थी 9.40 पर पहुंचा। इसके बाद ऑब्जर्वेशन रूम तक पहुंचने का प्रोसेस 6 मिनट में पूरा किया गया। ड्राई रन में 24 लाभार्थी पहुंचे, 1 लाभार्थी के मेडिकल लीव पर होने के कारण वो पहुंच नहीं सके। वहीं, असल वैक्सीनेशन के दौरान पूरा प्रोसेस 36 मिनट में पूरा कर लिया जाएगा।

उधर, डीएमसी, सब-डिवीजन अस्पताल जगराओं, खन्ना, रायकोट, सीएचसी माछीवाड़ा और धनोट में भी मॉक ड्रिल की गई। डीसी वरिंदर कुमार शर्मा ने 10.16 बजे मौके का दौरा किया। इस मौके पर एडीसी संदीप कुमार, एसडीएम बलजिंदर सिंह ढिल्लों, सिविल सर्जन डॉ. राजेश बग्गा, एसएमओ डॉ. अमरजीत कौर, डॉ. मलविंदर माला, चीफ फार्मासिस्ट अरुण कुमार भी मौजूद रहे।

ये कमियां आईं सामने: प्रोसेस बताने वाला नहीं कोई, बिना आईडी कार्ड के दिखा स्टाफ

मॉक ड्रिल में कई कमियां दिखी। मॉक ड्रिल समय पर नहीं शुरू हुई। 9 से 11 बजे तक का समय रखा था, लेकिन सारा प्रोसेस देरी से शुरू होने के कारण आधा घंटा का समय बढ़वाना पड़ा। सिविल अस्पताल में 11.30 बजे तक 24 लाभार्थियों का प्रोसेस पूरा हो सका। ऐसे में अगर असल वैक्सीनेशन के समय पर भी देरी हुई तो टाइम स्लॉट में गड़बड़ हो सकती है। ऐसे में 8 घंटे में 100 लाभार्थियों को वैक्सीन लगाने का टारगेट भी बिगड़ सकता है।
सबसे पहला समय पर स्टाफ साइट पर नहीं पहुंचा। लाभार्थियों को उन्हें भेजे गए एसएमएस के मुताबिक समय पर न आना। लाभार्थियों को सारे प्रोसेस के बारे में बताने और गाइड के लिए कोई नहीं था। सारी जानकारी

उन्हें वेटिंग एरिया या एंट्री से पहले में दी जानी चाहिए थी। गेट पर हाथ सेनेटाइज नहीं करवाए गए। स्टाफ ने ग्लब्स तक नहीं पहने थे। कुल 10 लोग ही ड्यूटी पर तैनात थे।
गार्ड को बैठने के लिए मेज-कुर्सी दी जानी चाहिए थी, ताकि वो लिस्ट को आराम से बैठकर पढ़ पाते और उन्हें मार्क कर पाते। टेंपरेचर चेक करने के लिए इंफ्रारेड थर्मामीटर दिया, लेकिन जानकारी दर्ज करने के लिए रजिस्टर नहीं दिया।

स्टाफ बिना एप्रन, आईडी कार्ड और नेम प्लेट के नजर आए। इसके चलते लाभार्थी पहचान न सके कि कौन-सा स्टाफ मेंबर है और कौन लाभार्थी। वहीं, सेशन साइट पर कार्यरत स्टाफ ने शू कवर भी नहीं पहने। इन्फेक्शन से बचाव के लिए लाभार्थियों को भी शू कवर नहीं दिए गए।

एसडीएम को लगानी पड़ी फटकार

एसडीएम ईस्ट बलजिंदर सिंह ढिल्लों सेशन साइट पर सुबह 10 बजे पहुंचे। उस समय तक सिर्फ दो ही लाभार्थियों ने प्रोसेस करवाया और ऑब्जर्वेशन रूम तक पहुंचे। एसडीएम ने जब ये देखा तो उन्होंने स्टाफ को फटकार लगाई और कहा कि सारा प्रोसेस ही इतना देरी से चल रहा है। इस पर लिस्ट के मुताबिक अन्य लाभार्थियों को एक स्टाफ मेंबर को भेज कर बुलाया गया। कई लाभार्थियों ने कहा कि उनकी नाइट ड्यूटी थी, जिस कारण वो पहुंचने में लेट हो गए। 10 बजे के बाद अन्य लाभार्थी पहुंचे और प्रोसेस आगे बढ़ सका। जबकि 5-5 लाभार्थियों को अलग-अलग स्लॉट में बुलाया गया था।

सेशन साइट से 82 कदम पर कोल्ड चेन

सिविल अस्पताल के मदर चाइल्ड अस्पताल में सेशन साइट से कोल्ड चेन 82 कदमों की दूरी पर है।

लाभार्थी की रजिस्ट्रेशन पहले से ही को-विन पोर्टल पर की गई है। यहां पर मरीज के नाम समेत पूरी जानकारी पहले से फीड है। इस वैक्सीनेशन प्रोसेस में अधिकतर काम ऑनलाइन है। इससे ज्यादा दिक्कत नहीं आएगी।
जिले में सरकारी-निजी अस्पतालों के 29 हजार 600 हेल्थ केयर वर्कर अब तक रजिस्टर हो चुके हैं।



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Every beneficiary takes 6 minutes to reach the Observation Room from entry, actually the entire process will be 36 minutes

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December 30, 2020 at 04:52AM

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