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Thursday, April 23, 2020

काली बेईं, बुड्‌ढा नाला में इंडस्ट्रियल वेस्ट कम गिर रहा, सतलुज का पानी साफ

लॉकडाउन के कारण सभी फैक्ट्रियाें, कारखानाें में काम बंद होने से सतलुज और अन्य नदी-नालों में गिरने वाले इंडस्ट्रियल वेस्ट में भी कमी आई है। सतलुज के पानी में सुधार देख एनजीटी कमेटी के मेंबर संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के सेक्रेटरी बाबूराम से नदियों के पानी की सैंपलिंग की मांग की है ताकि पता चल सके कि फैक्ट्रियां किस स्तर तक पानी को जहरीला बना रही हैं। संत सीचेवाल का कहना है कि इस वक्त सतलुज, काली बेईं समेत सभी नदियों के पानी की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिल रहा है। सैंपल की रिपोर्ट मिलने पर भविष्य में पानी को कैसे साफ रखा जाए, इसका ब्लूप्रिंट तैयार हो सकेगा।

एनजीटी मेंबरबोले, पीसीबी सतलुज और अन्य नदियों के पानी के सैंपल जल्द भरे

संत बलबीर सिंह सीचेवाल बताते हैं कि बाढ़ का खतरा कम करने के लिए गिदड़पिंडी में खुदाई चल रही है। इस दौरान पाया गया कि जो पानी जालंधर की तरफ से बहते हुए हरिके पतन की तरफ जा रहा है, उसकी क्वालिटी सुधरी है। पानी में पॉल्यूशन कम हुआ है। इसकी मुख्य वजह जालंधर और लुधियाना का सीवरेज का पानी कम होना है। पीसीबी से कहा है कि सतलुज, काला संघिया नाला और बुड्ढा नाला के पानी की सैंपलिंग करवाएं। सतलुज, काला संघिया ड्रेन और लुधियाना के बुड्ढा नाला में लॉकडाउन के दौरान फैक्ट्रियां और व्यापारिक संस्थान बंद होने से पाॅल्यूशन घटा है।

ब्यास के पानी की क्वालिटी की जांच के लिए लगेंगे सेंसर

श्री गुरु नानक देव जी की चरण स्पर्श प्राप्त काली बेईं का सौंदर्य इन दिनाें देखने लायक है। इसकी वजह सुधरी हुई एयर क्वालिटी, पानी में ऑक्सीजन के लेवल में बढ़ोतरी है। बिल्कुल साफ रखने के लिए विभिन्न कस्बों में लगे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट पर संत बलबीर सिंह सीचेवाल और सुबह सेवक नजर रखते हैं। पीसीबी ने ब्यास नदी में रोजाना पानी की क्वालिटी की रिपोर्ट देने वाले सेंसर लगाने के टेंडर निकाले थे। अभी यह सेंसर फिट किए जाने बाकी हैं। इस कारण पानी की क्वालिटी जांच करने के लिए सैंपल लिए जा रहे हैं। इनकी रिपोर्ट बाद में रिलीज की जाएगी।

जलीय जीव हाे चुके हैं खत्म

सतलुज नदी 1450 किलोमीटर लंबी है। रोपड़ हेड वर्क्स में इसका पानी प्रवेश करता है। इसके बाद फिरोजपुर के रास्ते यह नदी पाकिस्तान में जाती है। रोपड़ से लेकर जालंधर के फिल्लौर तक पानी साफ है। लुधियाना, तरनतारन में शहर का सीवरेज जगह-जगह मिलने लगता है। जालंधर के फिल्लौर और शाहकोट में इसमें जलीय जीव पूरी तरह से खत्म हो चुके हैं। इसके एरिया का ग्राउंड वाटर भी खराब हो चुका है। ब्यास नदी पंजाब में सबसे साफ है। यह 470 किलोमीटर लंबी है। यह हिमाचल से शुरू होती है। लेकिन हरिके पतन में जहां सतलुज और ब्यास नदी का मिलन होता है। वहां पर शहरी सीवरेज व्यास से राजस्थान को जाने वाले पानी को भी गंदा कर देता है। अब राजस्थान को ब्यास से पूरा साफ पानी मिल रहा है।



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Kali Bei, industrial waste in Budha Nala is declining, water of Sutlej is clean

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April 23, 2020 at 05:00AM

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