पंजाब में शिक्षा विभाग में सरकारी नौकरी करने वालों की अब खैर नहीं जो नौकरी के साथ पत्रकारिता भी कर रहे हैं। विभाग ने पत्र जारी करके बताया कि ऐसे कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अतीत में अगर किसी अधिकारी ने कर्मचारियों को पत्रकारिता करने की अनुमति दी तो उसे रद्द माना जाएगा। गौर हो कि शिक्षा विभाग की सूची में 270 से अधिक ऐसे कर्मचारी हैं अध्यापक की नौकरी के साथ पत्रकारिता भी कर रहे हैं।
यही नहीं वह अपनी पत्नी और पारिवारिक सदस्य के नाम पर भी पत्रकारिता कर रहे हैं। विभाग को सरकार ने चेताया था कि कुछ कर्मचारी नौकरी के साथ विभाग के अधिकारियों को धमकाने के इरादे से पत्रकारिता कर रहे हैं।
ये कर्मचारी-कम-पत्रकार सरकार की नीतियों के खिलाफ लिख रहे हैं। कुछ तो पत्रकारिता से मानदेय अथवा वेतन भी ले रहे हैं, जबकि शिक्षा विभाग में अपनी ड्यूटी करने में वे असफल हो रहे हैं।
डीटीएफ ने फरमान काे नादरशाही करार दिया
ऐसे कर्मचारियों में समाचार लिखने वाले पत्रकार हैं, लेखक, पुस्तक लेखक और कुछ टीवी चैनलों पर बहस में भाग लेते हैं। सरकारी नियमों के अनुसार सरकारी कर्मचारी बिना अनुमति के किसी भी समाचार पत्र, टीवी चैनेल बहस में हिस्सा नहीं ले सकता।
कुछ कर्मचारी नामी समाचार पत्रों के लिए खुलेआम काम कर रहे हैं। कुछ पुस्तकें प्रकाशित करवा रहे हैं। पत्र में कहा गया है कि ऐसे कर्मचारी सहयोगी कर्मचारियों और अधिकारियों को पत्रकारिता के माध्यम से ब्लैकमेल कर सकते हैं, इसलिए ऐसे कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, अध्यापक जत्थेबंदी डीटीएफ के जिला प्रधान अश्विनी अवस्थी और बाकी पदाधिकारियों ने सरकार की उक्त फैसले काे नादरशाही फरमान करार दिया है। सरकार द्वारा यह आदेश संविधान में मिली विचारों की आजादी के खिलाफ है।
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July 02, 2020 at 05:10AM
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