मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च डिपार्टमेंट ने बुधवार को दरबार साहिब के पूर्व हजूरी रागी निर्मल सिंह खालसा के इलाज में लापरवाही के आरोपों और पीपीई किट घोटाले से सुर्खियों में आए अमृतसर मेडिकल कॉलेज से जुड़े 3 बड़े चेहरों पर कार्रवाई की।
कैबिनेट मंत्री ओपी सोनी की अगुवाई वाले विभाग के प्रमुख सचिव डीके तिवारी ने अमृतसर मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. सुजाता शर्मा और वाइस प्रिंसिपल डॉ. वीना वलेचा को उनके पदों से हटा दिया।
इसके साथ ही मेडिकल कॉलेज के तहत आते गुरु नानक देव अस्पताल (जीएनडीएच) में मेडिसिन विभाग के प्रमुख और जिला में ‘कोविड-19’ के इंचार्ज प्रोफेसर शिवचरण को भी अमृतसर से पटियाला ट्रांसफर कर दिया गया।
डीके तिवारी की ओर से जारी ऑर्डर में लिखा गया है कि यह फैसला प्रबंधकीय कारणों और लोकहित में लिया गया है।
डॉ. सुजाता की जगह अमृतसर मेडिकल कॉलेज के रेडियोथैरेपी विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजीव देवगन को नया प्रिंसिपल और जीएनडीएच के एनाटमी विभाग के प्रोफेसर डॉ. जगदेव सिंह कुलार को नया वाइस प्रिंसिपल बनाया गया है।
डॉ. कुलार जीएनडीएच के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट भी रह चुके हैं।गौरतलब है कि डॉ. सुजाता के प्रिंसिपल बनने के बाद से ही अमृतसर मेडिकल कॉलेज व उसके तहत आने वाला जीएनडीएच किसी न किसी वजह से सुर्खियों में रहा है और अस्पताल प्रबंधन हालात से निपटने में नाकाम नजर आया।
हजूरी रागी निर्मल सिंह खालसा अमृतसर में कोरोना से मरने वाले पहले मरीज थे। उनके परिवार ने अस्पताल प्रबंधन पर उनके इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए थे। इसके साथ ही पीपीई किट घोटाला भी हाे गया।
डॉ. सुजाता शर्मा के जाने की 5 मुख्य वजह
1. बार-बार स्टाफ का प्रदर्शन:
कोरोना काल के दौरान अमृतसर मेडिकल कॉलेज और जीएनडीएच का स्टाफ समय-समय पर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करता रहा।
डॉ. सुजाता उनके मसले को सही से हैंडल नहीं कर पाई। यही नहीं डॉ. सुजाता शर्मा से बाकी स्टाफ भी नाराज था।
2. एमबीबीएस स्टूडेंट में स्टाइपंड को लेकर रोष :
कॉलेज के एमबीबीएस स्टूडेंट कोरोना काल के बीच स्टाइपंड को लेकर प्रदर्शन करते रहे। उन्हें समझाने में डॉ. सुजाता विफल रहीं।
3. कोरोना से जीएनडीएच में सबसे ज्यादा मौतें :
कोरोना के कारण जिले में हुई 44 मौतों में से करीब 80% जीएनडीएच में ही हुई। हालांकि सबसे ज्यादा मरीजों का इलाज भी यहीं हुआ है। यहां दूसरे जिलों के मरीजों का इलाज भी किया जा रहा है।
सबसे ज्यादा मौतों को लेकर डॉक्टरों का तर्क है कि मरीज के परिजन पहले निजी अस्पताल ले जाते है। जब स्थिति क्रिटिकल होती है तो उसे जीएनडीएच ले आते हैं।
4. पीपीई किट खरीद घोटाले में भूमिका प्रभावी नहीं :
पीपीई किट खरीद में लगे घोटाले के आरोपों और उसकी जांच में डॉ. सुजाता कोई प्रभावी भूमिका नहीं निभा पाईं, बल्कि कॉलेज प्रबंधन ने घोटाले के खिलाफ आवाज उठाने वालों को नोटिस भी जारी कर दिए थे।
5. दो-दो सिविल सर्जन से अनबन :
डॉ. सुजाता सेहत विभाग के अधिकारियों से भी तालमेल नहीं बैठा पाईं। चाहे वो पूर्व सिविल सर्जन प्रभदीप कौर जौहल हों या डॉ. जुगल किशोर। सेहत मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू भी पिछले दिनों जब अमृतसर आए तो उन्होंने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की खामियों पर सवाल उठाए थे।
डॉ. शिवचरण के तबादले का मुख्य कारण खालसा की मौत
डॉ. शिवचरण के तबादले बारे में माना जा रहा है कि उन पर कोरोना संक्रमित हुए दरबार साहिब के पूर्व रागी भाई निर्मल सिंह खालसा का मामला भारी पड़ा है।
चूंकि डॉ. शिवचरण मेडिसिन विभाग के मुखी होने के साथ ‘कोविड-19’ के इंचार्ज भी थे। रागी के इलाज के ही दौरान उनके परिवार वालों ने इलाज में कोताही का आरोप लगाया था और बाद में उनकी मौत भी हो गई थी।
डॉ. राजीव देवगन नए प्रिंसिपल, पद संभाला
रोजाना उठा रहे विवादों की वजह से मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च डिपार्टमेेंट सुर्खियों में आ रहा था। इसलिए सरकार और महकमे के मंत्री ओपी सोनी ने डैमेज कंट्रोल के लिए तबादलों का रास्ता चुना है।
प्रिंसिपल डॉ. सुजाता शर्मा को पद से हटाए जाने के बाद कॉलेज के रेडियो थैरेपी विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजीव कुमार देवगन को प्रिंसिपल लगाया गया।
पद से हटाना या तबादला नहीं, सीधी कार्रवाई होनी चाहिए थी: अमतेश्वर सिंह
तीनों अिधकारियों पर हुई कार्रवाई से रागी निर्मल सिंह खालसा का परिवार संतुष्ट नहीं है। परिवार का कहना है कि पद से हटाना और तबादला करना मसले का हल नहीं है, बल्कि इसमें सीधी कार्रवाई होनी चाहिए।
खालसा के बेटे अमतेश्वर सिंह ने आरोप लगाया था कि अस्पताल में उनके पिता के इलाजा में लापरवाही बरती गई। उन्होंने एसएसपी को ऑनलाइन शिकायत की थी।
इसके बाद जांच के लिए कमेटी गठित की गई, जिसे उन्होंने अपना बयान भी दिया था। उनका कहना है कि कार्रवाई से साफ है कि उनके आरोपों में सच्चाई है।
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July 02, 2020 at 04:34AM
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