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Thursday, July 2, 2020

किटों में न शूज थे; न चश्मा, एन-95 की जगह पकड़ा दिए डस्टप्रूफ मास्क

पीपीई किटोें की खरीद में हुए कथित घोटाले की परतें खुलने लगी हैं। जांच का जिम्मा संभाल रही पुडा की प्रशासक डॉ. पल्लवी चौधरी की जांच के दूसरे दिन मेडिकल कॉलेज और जीएनडीएच के जिन लोगों के बयान कलमबंद किए उन्होंने किटों की एक-एक खामियां उनके समक्ष रखीं।

अब तक तो आम आदमी तक यही बात सामने आ रही थी कि इनकी क्वालिटी खराब थी और यह पहनने के दौरान ही फट जाया करती थीं, लेकिन बुधवार के बयान में कई एेसे पहलू सामने आए हैं जिससे साबित होता है कि इनकी खरीद में वाकई में लापरवाही बरत कर इसे पहनने वालों की जान को जोखिम में डालने की कोशिश की गई है।

खैर, बुधवार को बयान दर्ज करवाने वालों में पैरा मेडिकल के नरिंदर सिंह, प्रेम चंद, नर्सिंग यूनियन के नरिंदर बुट्टर, लखविंदर कौर और कोरोना वार्ड की इंचार्ज विष्णु शामिल रहीं।

जानकारी के मुताबिक इनकी तरफ से दिए गए बयान में पीपीई किटों के फटने, साइज चुस्त होने के अलावा उनमें शूज तक नहीं दिए गए थे और न ही एेनक थे।

किटों के साथ एन-95 मास्क होना चाहिए, लेकिन नार्मल डस्टप्रूफ मास्क देकर पल्ला झाड़ लिया गया था। इन किटों में पसीना सोखने की भी क्षमता नहीं रही है।

500 रुपए की किट 2000 रुपए में खरीदने के आरोप

जीएनडीएच को मिले सांसद निधि के फंड मेंसे 43 लाख रुपए से अधिक रकम की किटें खरीदी गईं थी, मगर जब उन्हें डॉक्टरों ने पहना तो ये फटने लगीं।

आरोप यह भी लगा था कि किटों की कीमत बमुश्किल 500 रुपए थी, लेकिन खरीदी गईं 2000 से 2500 रुपए में। इसके बाद विवाद शुरू हो गया तो डीसी ने जांच के आदेश दिए।

मगर जांच की रफ्तार ढीली रही। सांसद गुरजीत सिंह औजला ने केंद्र सरकार को इसमें दखल देने की अपील की तो जांच फिर से ट्रैक पर लौटी है।



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बयान कलमबंद करवा कर आते नर्सिंग और पैरा मेडिकल स्टाफ के सदस्य।

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July 02, 2020 at 04:37AM

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