लाॅकडाउन के चार महीनों के दौरान पुलिस फील्ड में थी, लेकिन इसके बावजूद मोबाइल, पर्स और चेन स्नेचिंग की वारदातों में कमी नहीं आई। इसमें छोटी-बड़ी सभी झपटमारी की वारदातें शामिल रहीं।
मगर इन वारदातों में लुटेरों ने कुछ अलग ट्रेंड का इस्तेमाल किया, जोकि करीब 70 फीसदी मामलों में एक जैसा ही पाया गया। वो रहा मास्क और उल्टे सीधे नंबरों की प्लेट्स का।
आंकड़ों की बात करें तो 4 माह में झपटमारी की 41 के करीब वारदातें हुईं, जोकि पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हैं। इसके अलावा भी बहुत-सी वारदातें एेसी हुईं। इनकी शिकायतें या तो थानों में पड़ी है या फिर पीड़ित पक्ष ने कार्रवाई करवाई ही नहीं।
इन सबके बीच पुलिस की स्नेचरों पर कार्रवाई के दावे भी खोखले नजर आ रहे हैं, क्योंकि जेल से बाहर आने के बाद वो दोबारा वारदातों में शामिल हो रहे हैं।
हालांकि पुलिस कमिश्नर राकेश अग्रवाल का कहना है कि झपटमारी की वारदातों पर काफी नकेल कसी भी गई है। एेसे अपराधियों पर 110 का कलंदरा भी दर्ज किया जा रहा है। आने वाले दिनों में और भी सख्ती की जाएगी।
फुटेज में पढ़े नहीं जा रहे झपटमारों के वाहनों के नंबर
कोरोना से बचाव के लिए पुलिस ने लोगों को मास्क का इस्तेमाल करने के लिए कहा है। मगर झपटमार इसका गलत फायदा उठा रहे हैं। इन चार महीनों में हुई वारदातों में झपटमारों में न हेलमेट लिया और न ही रूमाल बांधा।
उन्होंने सिर्फ मास्क का इस्तेमाल किया, क्योंकि उससे भी उनके चेहरे का कुछ पता ही नहीं चलता।
इसके अलावा जिस नंबर प्लेट का इस्तेमाल किया गया, उस पर जिन नंबरों का इस्तेमाल किया वो भी ऐसे लिखे गए, जोकि सीसीटीवी फुटेज में भी पढ़े नहीं जाते। इसका फायदा उठाकर वो बच निकल रहे हैं।
हिस्ट्रीशीटरों पर नजर रखने को थानों में नहीं लगाईं अटेंडेंस मशीनें
पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि हिस्ट्रीशीटरों पर नजर रखने के लिए थानों में अटेंडेंस मशीनें लगवाई जाएंगी। इसमें जेल से बाहर आए हुए अपराधी अटेंडेंस लगाकर जाएंगे और थाने में बताएंगे कि वो क्या कर रहे हैं, लेकिन वो भी फेल साबित हो गई।
इसका खामियाजा ये भुगतना पड़ा कि जेल से आने के बाद झपटमारों ने फिर वारदातें शुरू कर दी। पुलिस के मुताबिक 90 फीसदी मामलों में छीना-झपटी करने वाले वही हैं, जोकि जेल गए थे और फिर बाहर आकर ये धंधा करने लगे, लेकिन पुलिस ने उनपर ध्यान ही नहीं दिया।
इन वारदातों में सबसे ज्यादा महिलाओं को ही टारगेट किया गया। हैरानीजनक है कि जिन आरोपियों को पुलिस पकड़ रही है, उनसे पुलिस रिकवरी नहीं करवा पाई। सिर्फ 20 फीसदी मामलों में ही रिकवरी हुई।
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July 04, 2020 at 05:21AM
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