शिराेमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने ऐतिहासिक गुरुद्वाराें के नजदीक जंगल स्थापित करने का काम शुरू कर दिया है।
कमेटी के प्रधान भाई गाेबिंद सिंह लाैंगाेवाल की अगुवाई में आयोजित मीटिंग के दाैरान पर्यावरण की संभाल का फैसला लिया गया था।
बैठक में फैसले के मुताबिक एसजीपीसी के प्रबंध वाले विभिन्न गुरुद्वाराें में एक-एक एकड़ के बाग लगाने की याेजना बनाई गई थी। इसके लिए बाबा सेवा सिंह खडूर साहिब वालाें से सेवाएं ली जा रही हैं।
गत दिना इसकी शुरुअात गुरुद्वारा बीड़ बाबा बुड्ढा साहिब और गुरुद्वारा बीर सिंह रताेके तरनतारन से शुरू की गई थी।
शुक्रवार को मुहिम के तहत गुरुद्वारा पातशाही 5वीं ओठियां (बटाला) में जंगल लगाने का कार्य शुरू किया गया। इस माैके पर शिराेमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के मुख्य सचिव डाॅ. रूप सिंह ने अरदास की और संगत के साथ विभिन्न किस्म के 2500 पाैधे लगाए।
कमेटी की सीनियर उप-प्रधान भाई रजिंदर सिंह मेहता ने बताया कि जंगल ज्यादा हाेने से पर्यावरण में शुद्धता और ताजगी आएगी, जबकि पक्षियाें काे भी बेहतर माहाैल मिलेगा।
डाॅ. रूप सिंह ने कहा कि गुरुद्वारा साहिबान संगत के लिए प्रेरणा स्राेत हैं और यहां से काेई भी संदेश संगत के लिए प्रभावशाली हाेता है।
पर्यावरण की शुद्धता के लिए प्रेरणा पैदा करने लिए ही गुरुघराें में जंगल लगाने का कार्य शुरू किया गया है। उन्हाेंने बताया कि 50 किस्म के पाैधे जंगलाें में लगाए जाएंगे।
इनमें पीपल, बाेहड़, नीम, हरड़, बहेड़ा, आंवला, जंड, टाहली, देसी किकर, अर्जन, गुल्हड़, धरेक, बकैण, शरींह, पुत्रनजीवा, झिरमिल, सखचैन, सागवान, अमलतास, पहाड़ी किकर, बांस, चकरासिया, आम, जामुन, अमरूद, आड़ू, कटहल, लसूड़ा, बिल पत्र, अंजीर, देसी बेरी, ढेऊं, अनार, शहतूत, चंदन, करी पत्ता, कणक चंपा, चांदनी, मरूअा, हार शिंगार, रात की राणी, जटराेफा, कनेट, सहंजन, हरविसकक पाैधे शामिल हैं।
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July 04, 2020 at 04:52AM
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