(अनुभव अवस्थी)वृद्धावस्था पेंशन के नाम पर 162 करोड़ के घोटाले में अफसरों और कर्मचारियों की मिलीभगत और लापरवाही सामने आई है। हकीकत जानेंगे तो आपके होश उड़ जाएंगे। फर्जी पाए गए 70 हजार से अधिक पेंशन धारकों में 28 हजार ऐसे हैं, जिनके नाम और पते सही नहीं हैं। पेंशन का लाभ पाने को इन लोगों ने आवेदन किया, लेकिन अफसरों ने फार्मों की जांच किए बिना आवेदन अप्रूव्ड कर दिए।
इसके अलावा लगभग 20 हजार लोगों ने तहसील कर्मियों की मिलीभगत से वास्तविक आय छिपाकर इनकम सर्टिफिकेट बनवाया है। पेंशन लेने वालों में 12 हजार से अधिक मर चुके हैं। 10 हजार लोगों ने पेंशन पाने को कई अन्य तरीके के फ्राड किए हैं।
जालसाजी की ये स्ट्रेटजी: फर्जी पते पर खुले खाते बंद हैं, कैसे पकड़ेंगे
केस-1:नकोदर एरिया में रहने वाले रामप्रसाद दुनिया में नहीं हैं। लेकिन उनके नाम से वृद्धा पेंशन निकाली जा रही थी। हालांकि सरकार बदलने के साथ ही पेंशन मामले की जांच शुरू हुई तो कुछ दिन बाद ही राम प्रसाद के खाते आदि उनके परिजनों ने बंद करा दिए। सूत्र बताते हैं कि अब रामप्रसाद के परिजन पहले जहां रहते थे वह मकान भी छोड़कर कहीं दूसरी जगह चले गए हैं।
केस-2: जमुना देवी के नाम से पेंशन ले जा रही थी। इनका बस्ती पीरजादा इलाके का लिखा हुआ है। जांच में पता चला कि जिस पते के आधार पर पेंशन निकाली जा रही थी, वहां पर जमुना देवी या उनसे संबंधित कोई भी नहीं रहता है। जांच करने गए कर्मचारियों ने आसपास के लोगों से भी जमुना देवी के बारे में पूछा, लेकिन जमुना की वहां कोई जानकारी नहीं मिली।
जालसाजों को ढूंढना भी आसान नहीं होगा... क्योंकि, विभागीय सेटिंग से लोगों ने फर्जी नाम, पता व आय बनवाकर 2 से 3 सालों तक वृद्धावस्था पेंशन का लाभ लेते रहे। सरकार को शिकायत मिलने के बाद सैकड़ों जालसाजों ने खुद पेंशन लेनी बंद कर दी। अब विभागीय को ऐसे लोग को ढूंढना आसान नहीं होगा।
मुलाजिमों की जांच संभव
घोटाले की रिकवरी के आदेश होते ही जालसाजाें में हड़कंप मचा है। कार्रवाई से बचने को लोग दौड़ भाग कर रहे हैं। जानकारों कहा रहे हैं, इतने बड़े स्तर पर आवेदन पत्रों के जांच के नाम पर खानापूर्ति अधिकारियों की मिलीभगत के बगैर असंभव है।
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July 22, 2020 at 05:28AM
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