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Thursday, September 24, 2020

किसानों का समर्थन करने की सियासी होड़ अपने-अपने ट्रैक्टर, अपनी-अपनी रैलियां ,इधर- नवजोत सिंह सिद्धू ने भी किया प्रदर्शन, मार्च में सिर्फ काली झंडियां ही नजर आईं

केंद्र सरकार के कृषि विधेयकों के विरोध में आंदोलित किसानों के प्रदर्शन ने अब सियासी रूप ले लिया है। 2022 के विधानसभा चुनाव में सियासी-फसल काटने का मंसूबा पाले सभी राजनीतिक पार्टियां एकाएक किसान-हमदर्द बनकर मैदान में उतर गई हैं। हालांकि कमोबेश सबके निशाने पर केंद्र में सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी का साझीदार शिरोमणि अकाली दल ही है। वहीं भाजपा इस मुद्दे पर मौन-धारण करने वाली स्थिति में बनी हुई है।

कांग्रेस: दाखा हलके में किसानों के हक में गांव बद्दोवाल के पास जाहरवली पीर वाले ग्राउंड से ट्रैक्टर रैली निकाली। जिसकी कमान सीएम के सियासी सलाहकार कैप्टन संदीप सिंह संधू संभाल रहे थे। यह रैली गांव चौकीमान पहुंचकर खत्म हुई। कैप्टन संधू ने अकालियों पर केंद्र में सत्ता के मोह के चलते किसानों से धोखा करने का इल्जाम लगाया।

शिरोमणि अकाली दल : विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने भी इस मुद्दे पर सियासी-ताकत झोंकने में कोई कसर नहीं रखी। उनकी अगुवाई में गांव सवद्दी से शुरू हुई अकालियों की रैली में ट्रैक्टरों पर पार्टी के अलावा किसान संगठनों के झंडे भी नजर आए। रैली बद्दोवाल के धार्मिक स्थल पीर जाहर-वली के पास बने ग्राउंंड में खत्म हुई। अयाली ने जहां केंद्रीय मंत्री हरसिरमत कौर बादल के इस्तीफे को किसानों के हक में कुर्बानी करार दिया। वहीं, इल्जाम जड़ा कि किसान विरोधी विधेयक पारित कराने में राज्य सरकार भी मददगार रही है। खास बात ये रही कि कांग्रेस ने बद्दोवाल से रैली शुरू की तो अकालियों ने उसी जगह पर आकर रैली खत्म की। दोनों रैलियां ढट् शेखुपुरा में आसपास के लिंक-रोड से गुजरीं, लेकिन सीधे आमना-सामना नहीं हुआ।

आप : किसानी के मुद्दे को ध्यान में रखते हुए देहात हलके जगराओं से आम आदमी पार्टी की विधायक व उप-नेता विपक्ष सरबजीत कौर मणुके ने लुधियाना में प्रेस कांफ्रेंस रख सीधे अकालियों पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि 25 सितंबर शिअद ने भी चक्का जाम का एलान कर किसान आंदोलन को तारपीडो करने की साजिश रची है। साथ ही दावा किया कि पूरे सूबे के 12 हजार से ज्यादा गांवों में जाकर वर्कर किसान विरोधी बिलों के खिलाफ ग्राम सभाओं से प्रस्ताव पारित कराएंगे।

किसानों की अपील- दुकानें बंद करके समर्थन करें, व्यापार बर्बाद कर देगा बिल

भाकियू उगराहां की ओर से बाइक रैली निकाल 25 सितंबर को पंजाब बंद को सफल बनाने के लिए दुकानदारों और व्यापारियों को कारोबार बंद रखने की अपील की गई। कहा- बिल किसानों के साथ-साथ व्यापारियों को भी बर्बाद कर देंगे। इसलिए समर्थन करें।

बिलों पर रोक लगाने को राज्य को ‘प्रमुख मार्केट यार्ड’ घोषित करें कैप्टन: सुखबीर

शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल ने सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह से कहा कि वह पूरे पंजाब को कृषि उत्पादों के लिए ‘प्रमुख मार्केट यार्ड’ घोषित करें ताकि राज्य में कृषि मंडीकरण पर केंद्र के अधिनियम लागू न हों। यह पंजाब के लिए सबसे अच्छा, तेज और सबसे प्रभावी तरीका है कि राज्य में केंद्र के नवीनतम किसान विरोधी अधिनियम के आवेदन से पहले ही रोक दिया जाए क्योंकि केंद्र के लागू किए कानून किसी भी राज्य सरकार द्वारा घोषित प्रमुख बाजार यार्ड पर लागू नहीं होंगे।

बादल ने कहा कि राज्य सरकार के पास पूरे राज्य को ‘प्रमुख बाजार यार्ड, सब मार्केट यार्ड तथा मार्केट सबयार्ड’ करने की ताकत है। केंद्र द्वारा वर्तमान अधिनियमों के प्रावधान इन यार्ड यां चिंहित क्षेत्रों को कानून के अधिकार क्षेत्र से छूट देते हैं। इस प्रकार, यदि पंजाब सरकार पूरे राज्य को ‘एक प्रमुख मार्केट यार्ड’ घोषित करती है तो केंद्र का अधिनियम स्वचालित रूप से निष्क्रिय हो जाएगा और राज्य के किसी भी हिस्से पर लागू नहीं होगा। कैप्टन की विफलता की स्थिति में ‘शिअद की सरकार आने पर पहली कैबिनेट मीटिंग में इन्हें रद्द कर देगी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो आर्डिनेंस के जरिए या सेक्शन 7-ए एपीएमसी के तहत विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाए।

कृषि बिल किसान और किसानी ही नहीं लोक मारू भी, लागू नहीं होने देंगे : सिद्धू

पूर्व कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह ने भी रोष मार्च निकाला। उन्होंने कहा कि यह बिल किसान-किसानी ही नहीं बल्कि लोक मारू है, इसे लागू नहीं होने देंगे। सरकार ने पंजाबियों की गैरत को ललकारा है। उनके मार्च की खास बात ये रही कि सिर्फ काली झंडियां ही दिखीं।

इधर, बादल गांव से लौटते समय हादसे में घायल किसान की मौत, मुआवजे के लिए प्रदर्शन

बादल गांव में कृषि विधेयकों के विरोध में लगाया मोर्चा खत्म करके लौटते वक्त मंगलवार रात सड़क हादसे में घायल किसान की मौत हो गई। मरने वाले किसान के परिवार को मुआवजा और घायलों का सरकारी इलाज कराने की मांग को लेकर किसानाें ने आईटीआई चौक पुल पर बुधवार को सुबह से देर शाम तक धरना लगाकर मानसा व डबवाली मार्ग पर चक्का जाम किया। इससे तलवंडी, मौड़, मानसा का नेशनल हाइवे का आवागमन बुरी तरह से प्रभावित हुआ। दोपहर 12 बजे किसानों ने ओवरब्रिज पर डबवाली मार्ग पर भी धरना लगाकर चक्का जाम किया। पुलिस ने तीनों दिशाओं से पुल को जाने वाले रास्ते पर बैरिकेडिंग करके ट्रैफिक को डाइवर्ट किया।

किसान नेताओं ने मांग उठाई कि मृतक किसान के परिवार को 10 लाख रुपए मुआवजा, सारा कर्ज माफी तथा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिलाई जाए। वहीं, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान सुनील जाखड़ और वित्तमंत्री मनप्रीत बादल घायलों का हाल जानने के लिए मैक्स और सिविल अस्पताल में पहुंचे। वित्तमंत्री ने कहा कि किशनगढ़ के किसान मुख्तयार सिंह के परिवार की सरकार हरसंभव मदद करेगी। घायलों का इलाज पंजाब सरकार मुफ्त कराएगी। वहीं जाखड़ ने कहा कि सारी उम्र किसानों के नाम पर सियासत करने वाले सुखबीर व हरसिमरत ने किसानों की पीठ में छुरा घोंपा है।



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लुधियाना। गांव बद्दोवाल के पास जाहरवली पीर वाले ग्राउंड से ट्रैक्टर रैली निकालते कांग्रेसी।

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September 24, 2020 at 05:25AM

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