टोल प्लाजा के नजदीक सतलुज पुल पर रविवार की दोपहर को बाइक पर जा रहे दंपति को तेज रफ्तार ट्रक ने टक्कर मार दी। जिसके बाद अनियंत्रित होकर दोनों गिरे और उनके सिर पर से ट्रक निकल गया। हादसा होते ही लोगों ने ट्रक चालक को घेर लिया और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने मृतक सुरिंदर सिंह(40) और पत्नी रणजीत कौर(37) के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए रख दिया। वहीं, आरोपी ड्राइवर नवीन कुमार को गिरफ्तार कर उस पर पर्चा दर्ज कर दिया है। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है।
जांच अधिकारी सुखदेव सिंह ने बताया कि सुरिंदर गेंहू कटाई की मशीन चलाने व खेतों में काम करता था। उसके तीन बेटे गुरप्रीत सिंह(16), सिमरनजीत सिंह(14) और जसकरन सिंह(12) हैं। रविवार को वे अपनी पत्नी रणजीत कौर के साथ बाइक पर नंवाशहर अपने ससुराल जा रहा था। इस दौरान जब वो घर से चार किलोमीटर दूर सतलुज पुल पर पहुंचे तो पीछे से आरोपी नवीन जोकि यूपी से ट्रक लेकर जालंधर की तरफ जा रहा था ने उन्हें टक्कर मार दी। बाइक अनियंत्रित होने से दोनों सड़क के बीच गिर गए। जिसके बाद वही ट्रक दोनों के सिर के ऊपर से निकल गया।
चोरों ने लाशों को भी नहीं बख्शा : तलविंदर
रिश्तेदार तलविंदर सिंह ने बताया कि मौसा सुरिंदर सिंह के पिता लक्ष्मण सिंह की कुछ समय पहले मौत हो गई थी। लेकिन घर के हालात इतने बुरे थे कि वो उस समय पैसे भी नहीं लगा सके। लिहाजा मौसा ने ससुराल वालों से 10 हजार रुपए उधार लिये थे। गेंहू कटाई के लिए वो तीन महीनों से काम कर रहे थे, सीजन अच्छा गया तो कमाई भी अच्छी हो गई। वे उधार लिये पैसे लौटने निकले थे। उन्होंने आरोप लगाया कि चोरों ने लाशों को भी नहीं बख्शा। जब हादसे का पता चला और वो मौके पर पहुंचे तो न मौसा के पास से 10 हजार मिले और न ही मासी रणजीत कौर के कानों से बालियां मिलीं।
नहीं पहना था हेलमेट
सुरिंदर के माता-पिता का पहले ही देहांत हो चुका है। अब सुरिंदर और उसकी पत्नी की मौत के बाद परिवार में तीन बेटे ही रह गए हैं। जब उन्हें खाना खाने के लिए कहा तो गुरप्रीत और सिमरनजीत बोले, मम्मी-पापा केंहदे सी कल आवांगे, हुण हमेशा लई छड्ड गए...। वहीं मौके पर मौजूद लोगों का कहना था कि अगर बाइक सवार ने हेलमेट पहना होता तो शायद उसकी जान बच जाती।
डेढ़ किलोमीटर लंबा जाम लगा-हादसे के बाद टोल प्लाजा पर दो किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। जिसकी वजह से आवाजाई पूरी तरह से ठप हो गई। इस जाम को खुलवाने के लिए पुलिस को अच्छी खासी मशक्कत करनी पड़ी। करीब दो घंटे बाद जाम को खुलवाया गया।
^हमने शव पीड़ित परिवार के सामने उठवाए थे, हमें न पैसे मिले न बालियां। बाकी उनके परिजनों ने ही कहा था कि वो कोई पैसा लेकर घर से नहीं गए थे। फिर भी अगर कुछ है तो इसकी जांच कर लेंगे।
-सुखदेव सिंह, जांच अधिकारी थाना लाडोवाल
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December 07, 2020 at 05:06AM
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