लुधियाना के कारोबारी महावीर एनक्लेव निवासी राजेश जैन(62) द्वारा अपने घर को गार्बेज फ्री(कूड़ा मुक्त) बनाया ही गया है। लेकिन वो एनजीओ, स्टूडेंट्स को मुफ्त में ट्रेनिंग देकर उनसे ये वायदा लेते हैं कि वो भी आगे इस प्रोजेक्ट के बारे में 10 लोगों को बताएंगे। ताकि कूड़ा मुक्त करने में मदद मिल सके। कारोबारी राजेश जैन अपने घर में 2008 से वर्मी कंपोस्ट तैयार कर रहे हैं।
वहीं, उन्होंने अपने घर को गार्बेज फ्री(कूड़ा मुक्त) कर रखा है। यहां तक कि उनके घर में कोई भी कूड़ा उठाने वाला नहीं आता। यहां तक कि घर के किचन, बाथरूम से निकलने वाला पानी भी प्रोसेस होने के बाद उनके किचन गार्डन में जाता है। इससे कि उन्हें गार्डन में अलग से पानी भी देने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने महाराष्ट्री के चंद्रपुर जिले में रामाला झील साफ करने के प्रोजेक्ट में काम कर रही एनजीओ को भी कई तरह की सलाह दी है। जिसे वहां लागू भी किया जा रहा है।
वर्मी कंपोस्ट तैयार करने के तरीके में न ही बदबू, न ही पर्यावरण को नुकसान
राजेश जैन ने बताया कि वो अपने घर के किचन से निकलने वाले और अन्य बायोडिग्रेडेबल कूड़े से खाद तैयार करते हैं। घर के छोटे से कोने में उन्होंने वर्मी-कंपोस्ट तैयार करते हैं। उसी खाद का इस्तेमाल पूरे किचन गार्डन में होता है। इससे न सिर्फ उन्हें ऑर्गेनिक फल सब्जियां मिल रही हैं। बल्कि उनके घर से निकलने वाले कूड़े से पर्यावरण भी प्रदूषित नहीं होता। वर्मी कंपोस्ट तैयार करने के तरीके में न ही किसी तरह का कोई बदबू रहती है। न ही पर्यावरण को कोई नुकसान हो रहा है। यही नहीं केंचुओं को वो अपने जानकारों को भी उपलब्ध करवाते हैं और घर में ही प्रबंधन करने के लिए प्रेरित करते हैं।
किचन से निकलने वाले कूड़े से तैयार करते हैं खाद-राजेश जैन ने बताया कि वो अपने घर के किचन से निकलने वाले और अन्य बायोडिग्रेडेबल कूड़े से खाद तैयार करते हैं। घर के छोटे से कोने में उन्होंने वर्मी-कंपोस्ट तैयार करते हैं। उसी खाद का इस्तेमाल पूरे किचन गार्डन में होता है। इससे न सिर्फ उन्हें ऑर्गेनिक फल सब्जियां मिल रही हैं। बल्कि उनके घर से निकलने वाले कूड़े से पर्यावरण भी प्रदूषित नहीं होता। वर्मी कंपोस्ट तैयार करने के तरीके में न ही किसी तरह का कोई बदबू रहती है। न ही पर्यावरण को कोई नुकसान हो रहा है। यही नहीं केंचुओं को वो अपने जानकारों को भी उपलब्ध करवाते हैं और घर में ही प्रबंधन करने के लिए प्रेरित करते हैं।
घर-घर हो जाए कूड़े का प्रबंधन तो कई समस्याओं का हो सकता है हल
जैन ने बताया कि वो 85 देश घूम चुके हैं। उन्होंने बाहर कई तरह के प्रोजेक्ट देखे और पाया कि हमारे यहां अगर घर-घर में कूड़े का प्रबंधन हो जाए तो सड़कों के किनारे लगने वाले कूड़े को ढेर को खत्म किया जा सकता है। इससे न सिर्फ कूड़े का प्रबंधन होगा। बल्कि पर्यावरण को भी होने वाले नुकसान, बीमारियों को रोकने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि उन्होंने मशरूम फार्मिंग से अपनी खाली जमीन का इस्तेमाल करना शुरु किया था। लेकिन वो सिर्फ सर्दियों में ही हो पाती थी। बाकी मौसम में जमीन खाली रहती थी। जिसके बाद उन्होंने जानकारी जुटाई और वर्मी कंपोस्ट के प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी ली। इससे खाली जमीन का प्रयोग कर लिया। वहीं, घर के सीवरेज का पानी भी बर्बाद न हो इसके लिए टैंक में तीन हिस्से करवाए। जिससे कि प्रोसेसिंग हो जाए और आगे सब्जियों तक साफ पानी पहुंचे।
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December 07, 2020 at 05:21AM
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