सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन (सीसीआईएम) की तरफ से आयुर्वेदिक के पीजी स्टूडेंट्स और डॉक्टरों को जनरल सर्जरी, ईएनटी और दांतों के इलाज की मंजूरी देने का इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) और इंडियन डेंटल एसोसिएशन (आईडीए) ने विरोध किया है। इस संबंध में मंगलवार को आईएमए और आईडीए की जिला इकाई की तरफ से आईएमए हाउस में संयुक्त मीटिंग की गई। दरअसल सीसीआईएम ने आयुर्वेदिक के पीजी डॉक्टरों व स्टूडेंट्स को शल्य और शालाक्य चिकित्सा के अधीन नाक, कान, आंख और गले से जुड़ी बीमारियों का इलाज व सर्जरी करने का नोटिफिकेशन जारी किया है।
डॉक्टर दहिया बोले- 11 दिसंबर को निजी अस्पतालों में ओ कोविड और इमरजेंसी के मरीजों का ही किया जाएगा इलाज
मीटिंग के दौरान दोनों एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने इस नोटिफिकेशन का विरोध करते कहा कि आयुर्वेदिक डॉक्टर नाक, कान, आंख और त्वचा से जुड़ी माइनर सर्जरियां और दांतों का इलाज कैसे कर सकते हैं, जबकि ये पूर्ण तौर पर एलोपैथी पर ही डिपेंड करता है। वहीं दांतों के इलाज के लिए मार्केट में कई तरह की नई तकनीकें आ गई हैं। इन हालातों में आयुर्वेद के डॉक्टर अगर मरीजों का इलाज करते हैं तो ये मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ होगा। इसी के साथ उन्होंने 11 दिसंबर को निजी अस्पतालों में नॉन कोविड सेवाएं बंद करने का भी एलान किया है।
हम मिक्सोपैथी और क्रॉसुपैथी : आईएमए
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पंजाब प्रधान डॉ. नवजोत सिंह दहिया का कहना है कि हमारा किसी भी डॉक्टर के साथ मतभेद नहीं है। हम मिक्सोपैथी और क्रॉसुपैथी के हक में नहीं हैं। डॉक्टर ने जिस स्पेशलिटी में पढाई की है, वह उसी से संबंधित इलाज करे। वहीं काउंसिल की नोटिफिकेशन के विरोध में 11 दिसंबर को निजी अस्पतालों में सामान्य मरीजों का इलाज नहीं होगा। केवल इमरजेंसी सेवाएं ही दी जाएंगी। इसके अलावा कोरोना के मरीजों का इलाज होगा।
11 दिसंबर को आयुर्वेदिक डॉक्टर 1 घंटा ज्यादा काम करेंगे : नीमा
नेशनल इंटेग्रेटिड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) के पंजाब प्रधान डॉ. परमिंदर बजाज का कहना है कि हमारे जितने भी स्टूडेंट्स वर्तमान समय में पीजी की पढ़ाई कर रहे हैं उन्हें एलोपैथी और मेडिसन के पीएचडी स्तर के डॉक्टर पढ़ा रहे हैं। वहीं नीमा के डॉक्टर 11 दिसंबर को एक घंटा अतिरिक्त काम करेंगे और संबंधित जिलों के एसडीएम और उच्चाधिकारियों को सरकार द्वारा दी गई आयुर्वेद के डॉक्टरों को मंजूरी के लिए धन्यवाद कहेंगे।
क्या है शल्य और शालाक्य चिकित्सा
बता दें कि सीसीआईएम ने आयुर्वेद के पीजी डॉक्टरों और स्टूडेंट्स को 58 तरह के इलाज करने की मंजूरी दी गई है। आयुर्वेद में ग्रेजुएशन के बाद पीजी में दो प्रकार की पढ़ाई होती है। नोटिफिकेशन के मुताबिक भी इलाज को दो श्रेणियों में बांटा गया है, जिसमें शल्य और शालाक्य चिकित्सा शामिल है।
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December 09, 2020 at 04:48AM
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