प्रवीण पर्व | चार दशक में जालंधर में पूरे साल की औसत बारिश 705 एमएम से घटकर 500 पर आ गई है। दूसरी दिक्कत यह है कि मौोसम में बदलाव से सर्दी के सीजन की बारिश तेजी से घट रही है। बरसातें खत्म होने के बाद सितंबर से लेकर तक लगातार बरसातें घट रही हैं। बारिश न आने से एक तो जमीनी पानी रीचार्ज न होने से गिरा हुआ वाटर लेवल ऊपर नहीं आ पाता है और दूसरा अंधाधुंध दोहन से पानी के संसाधन भी बर्बाद हो रहे हैं। इस साल नवंबर पूरी तरह ड्राई रहा है जबकि दिसंबर का एक पूरा हफ्ता बीतने पर भी एक बूंद पानी नहीं बरसा।
अब 9 से 11 दिसंबर के बीच बूंदाबांदी के आसार हैं लेकिन स्थिति अभी भी कमजोर है। नेशनल ग्राउंड वाटर अथाॅरिटी की पिछले साल कंपाइल की गई रिपोर्ट के अनुसार जालंधर के सभी 10 ब्लाकों में 209 फीसदी पानी की खपत हो चुकी है। जबकि जमीनी पानी के संसाधन केवल 5355 मिलियन क्यूबिक मीटर ही बचे हैं। इन दिनों रात का टेंपरेचर 6-9 डिग्री तक गिर रहा है तो दिन में 24-25 डिग्री तक बना है। इस तरह रात व दिन के टेंपरेचर में भारी अंतर है। इसकी एक मुख्य वजह ये है कि अभी तक बारिश नहीं आई। खेतीबाड़ी माहिर डाॅ. राजिंदर सिंह कहते हैं कि प्रति व्यक्ति 135 लीटर पानी रोजाना चाहिए लेकिन पारंपरिक ट्यूबवेलों को आपस में जोड़ने से 250 लीटर तक पानी की सप्लाई हो रही है।
जिले के 10 में से 9 ब्लाॅक डार्क जोन में... जिले में 10 ब्लाॅक में पानी का स्तर 400 फीट से नीचे गिर चुका है। इनमें ब्लॉकों में से क्षमता से अधिक जमीनी पानी निकाला जा चुका है। केवल अादमपुर ही एक ऐसा ब्लॉक बचा है जहां पानी का लेवल 300 फीट पर औसतन है। इस कारण इसे जिले डार्क जोन से अलग रखा है।
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December 09, 2020 at 04:45AM
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