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Monday, December 7, 2020

आयुष्मान योजना के तहत क्लेम के 281 में 52 बिल हुए रिजेक्ट, 229 पास करके दिए 17.91 लाख रुपए

आयुष्मान भारत सरबत सेहत बीमा योजना के अधीन प्राइवेट अस्पतालों के रुके 281 बिलों में से 229 को क्लियर करवा दिया गया है। बीते दिनों प्राइवेट अस्पतालों ने आयुष्मान की इंश्योरेंस कंपनी पर बिलों को लेट रिसीव करने और पास न करने का आरोप लगाया था। इसपर डीसी घनश्याम थोरी ने सेहत विभाग के अधिकारियों और आयुष्मान योजना के अधीन इमपेनल्ड अस्पतालों के डॉक्टरों के साथ मीटिंग की और कुल 281 बिलों का समाधान करने के लिए कहा था। इसके बाद डिप्टी मेडिकल कमिश्नर दफ्तर द्वारा एक हफ्ते में सभी बिलों की रिपोर्ट डीसी को सौंपी गई।

इस रिपोर्ट के मुताबिक कुल 281 बिलों में से 229 को पास कर दिया गया जिनकी कुल रकम 17.91 लाख रुपए बनी है। बाकी बचे 52 बिलों को रद्द कर दिया गया है। डीएमसी दफ्तर द्वारा जिन बिलों को खारिज किया गया है, उन अस्पतालों के डॉक्टरों ने मरीज के इलाज के प्रति सही जानकारी सांझा नहीं की। डीएमसी डॉ. ज्योति शर्मा का कहना है कि हमने सारे बिलों की जांच कर रिपोर्ट डीसी दफ्तर में जमा करवा दी है।

बिलों को जांच के लिए 4 श्रेणियों में बांटा गया

1. जिन अस्पतालों ने क्लेम देरी से सब्मिट किया...आयुष्मान योजना के अधीन जो निजी अस्पताल इमपेनल्ड हैं, उन्हें मरीज के भर्ती होने पर पहले स्टेट इंश्योंरेस टीम को उसके इलाज की जानकारी देनी होती है। इसके बाद मरीज के अस्पताल से डिस्चार्ज होने के आखिरी दिन से अगले 15 दिन तक खर्च को इंश्योरेंस कंपनी को क्लेम करना होता है। बता दें इस श्रेणी में कुल 68 केस एेसे थे, जिनमें से 14 सरकारी और 54 प्राइवेट अस्पतालों की थे। इनमें से 4 केस पास नहीं किए गए जबकि बाकी केसों को पास किया गया है।

2. मरीज के इलाज के बारे में सही जानकारी नहीं दी... आयुष्मान योजना में जो इंश्योरेंस कंपनी बिल की अदायगी करती है, वह प्राइवेट अस्पताल से आने वाले हर बिल की वेरिफिकेशन करती है। कंपनी द्वारा बनाए गए डॉक्टरों का पैनल हर केस की बारीकी से जांच करता है। अस्पतालों को पोर्टल पर हर केस की सही जानकारी देनी पड़ती है। इस कैटेगरी के 65 केसों को जांचा गया है। इनमें कई अस्पतालों के पेपर पूरे न होने के कारण उनके केसों को खारिज कर दिया गया।

3. कंपनी की इंक्वायरी का जवाब नहीं दिया... प्राइवेट अस्पतालों के प्रबंधकों द्वारा डीसी के सामने यह मांग रखी गई थी कि बिल अप्रूव करने वाली इंश्योरेंस कंपनी उनकी बिल पास करने में काफी समय लगाती है। जबकि डीएमसी की बिलों की जांच में यह बात सामने आई है कि एेसे 21 मामले थे। इनमें कंपनी द्वारा अस्पतालों से कई मामलों में केस इंक्वायरी मांगी गई थी लेकिन अस्पतालों ने समय पर मुहैया नहीं करवाई। इस कारण वह केस खारिज कर दिए गए।



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Under Aayushman Yojana, 52 bills were rejected in 281 claims, 229 passed and paid 17.91 lakh rupees.

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December 07, 2020 at 04:54AM

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