कृषि कानूनों के खिलाफ मंगलवार को भारत बंद की काॅल के चलते शहर 5 घंटे तक पूरी तरह थम गया। सभी छोटे-बड़े बाजार, पेट्रोल पंप, दवा दुकानें, ट्रांसपोर्टेशन पूरी तरह से किसानों के हक में बंद रखा गया। हालांकि सरकारी संस्थान, अस्पताल, बैंक, बस स्टैंड और स्टेशन खुले रहे। मगर शहर में 20 जगहों पर लगे धरनों और रास्ते बंद होने की वजह से इन खुली हुई सुविधाओं का फायदा नहीं उठा पाए।
नतीजतन अधिकतर लोगों को अच्छी-खासी परेशानी झेलनी पड़ी। सुबह करीब 10.15 बजे से सभी चौराहों और इलाकों में किसानों के हक में सामाजिक, राजनीतिक और कारोबारी यूनियनें जुटने लगीं और उन्होंने धरना प्रदर्शन किया। इससे पहले तैनात किए गए 2500 मुलाजिमों ने धरनास्थलों से 100 फीट पहले ही बैरिकेडिंग कर उसे बंद कर दिया। लिहाजा यहां प्रदर्शनकारी दोपहर 3 बजे तक डटे रहे। इसके बाद बाजारों में अधिकतर दुकानें खुल गईं और लोग सड़क पर नजर आने लगे।
अकाउंटेंट वरुण ने बताया कि उन्हें पटियाला रिश्तेदार के घर जाना था, क्योंकि उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, लेकिन उन्हें ट्रांसपोर्टेशन का कोई साधन नहीं मिला। रास्ते में कुछ जगह उनके साथ बदतमीजी भी की गई। वो किसानों का समर्थन करते हैं, मगर लोगों को परेशान करना गलत है।
अभिषेक ने बताया कि वो अपनी दवा लेने के लिए घर से निकले थे, लेकिन आसपास कोई भी स्टोर खुला नहीं मिला। एमरजेंसी बताने पर भी किसी ने मदद नहीं की। लिहाजा माणकवाल से आकर डीएमसी के बाहर से दवा लेनी पड़ी।
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December 09, 2020 at 05:06AM
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