गुरु अंगद देव वेटरनरी व एनीमल साइंसेस यूनिवर्सिटी को वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की ओर से एंटीबायोटिक प्रतिरोध समर्थता विषय पर रिसर्च प्रोजेक्ट हासिल हुआ है। जोकि गर्व की बात है। यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर रिसर्च डॉ. जेपीएस गिल ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत यूनिवर्सिटी द्वारा दक्षिणी पूर्वी एशिया क्षेत्र में पशुओं के उत्पादन और खेतीबाड़ी क्षेत्र में एंटीबायोटिक इस्तेमाल करने की स्थिति का विश्लेषण किया जाएगा। इसके साथ ही भोजन सुरक्षा, प्रतिरोधक क्षमता और एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (एएमआर) भी जांचा जाएगा।
दक्षिणी पूर्वी एशिया में एंटीबायोटिक प्रतिरोध की समर्थता की समस्या को हल करने के लिए भी यूनिवर्सिटी द्वारा सिफारिश दी जाएगी। यही नहीं इस प्रोजेक्ट के जरिए कमजोर क्षेत्रों की भी पहचान संभव हो सकेगी। ये रिसर्च स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ व जूनोसिस को दक्षिणी पूर्वी एशियन रीजन के रीजनल ऑफिस द्वारा दी गई है। इस प्रोजेक्ट की अध्यक्षता स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ व जूनोसिस के प्रोफेसर डॉ. रणधीर सिंह करेंगे। एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (एएमआर) पर यूनिवर्सिटी द्वारा पिछले कई सालों से काम किया जा रहा है। इसी के चलते डब्ल्यूएचओ द्वारा ये प्रोजेक्ट यूनिवर्सिटी को सौंपा गया है।
नहीं हुआ तुरंत हल तो 2050 तक 1 करोड़ लोग हर साल खो सकते हैं जान
डॉ. रणधीर सिंह ने बताया कि एएमआर एक बेहद ही महत्वपूर्ण मुद्दा है। जिससे विश्व स्तर की कई सेहत समस्याएं जुड़ी हुई हैं। इंसानों और पशुओं के सेहत क्षेत्र में इनका अंधाधुंध इस्तेमाल समस्या को लगातार बढ़ा रहा है। अगर इस समस्या का तुरंत हल नहीं किया गया तो 2050 तक 1 करोड़ लोग हर साल अपनी जान गंवा देंगे। वहीं, छोटी और मध्यम आय वाले देशों में असर ज्यादा देखने को मिलेगा। स्कूल अॉफ पब्लिक हेल्थ और जूनोसिस के डायरेक्टर डॉ. आरएस औलख ने कहा कि भोजन वाले जानवर और जानवरों का चारा एंटीबायोटिक प्रतिरोधकता को बढ़ाने में सबसे ज्यादा किरदार निभा रहे हैं। वहीं, लगातार बढ़ रही जनसंख्या और भोजन की बढ़ रही मांग भी इस समस्या को और ज्यादा बढ़ा रही है।
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December 08, 2020 at 05:12AM
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