केंद्र सरकार द्वारा लागू किए जाने वाले 3 कृषि कानूनों के विरुद्ध अलग-अलग किसान संगठनों द्वारा मंगलवार को भारत बंद के तहत अबोहर भी शांतिपूर्वक ढंग से सफलतापूर्वक 100 प्रतिशत बंद रहा। ऐसा पहली बार देखने को मिला कि जब हर किसी सामाजिक, गैर सामाजिक, व्यापारिक तथा अलग-अलग संगठनों ने इस बंद के दौरान लिखित रूप में अपना समर्थन जारी किया था।
पूरा दिन बाजार बंद रहने से जहां शहर की हर व्यवस्था प्रभावित हुई, वहीं नेशनल हाई-वे पर किसानों द्वारा चक्का जाम करके 3 बजे तक आवागमन बंद रखा गया। केंद्र सरकार के मंत्रियों एवं अधिकारियों से किसानों की मीटिंग में कोई फैसला न होने से किसान संगठनों ने पूरे भारत में बंद का एलान किया था। मेडिकल स्टोर खुलने, स्वास्थ्य सुविधाओं में बाधा न डालने, शोक व विवाह समारोह में शामिल होने जा रहे लोगों को छूट देने के अलावा कोई अन्य गतिविधि होती हुई नजर नहीं आई।
एक तरफ जहां पेट्रोल पंप बंद पड़े हुए थे वहीं दूसरी तरफ हर बाईपास पर किसानों ने नाके लगाकर आवागमन नहीं होने दिया। किसानों ने हनुमानगढ़ बाईपास पर पार्षद गुरमनदीप सिंह सिद्धू व अन्यों के नेतृत्व में, सीतो बाईपास व गांव में भाकियू के अक्षय बिश्नोई व अन्यों के नेतृत्व में, बिश्नपुरा के पास, श्रीगंगानगर बाईपास, खुईयांसरवर के पास, मलोट रोड, फाजिल्का रोड वं कई छोटे-छोटे रास्तों पर 3 बजे तक जाम लगाए रखा।
दिल्ली मोर्चे में अबोहर के बहुत कम किसान शामिल
एक किसान संगठन के प्रवक्ता ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर मलाल जाहिर करते हुए कहा कि पूरे देश में इतना बड़ा प्रदर्शन हो रहा है, लेकिन अबोहर के किसान दिल्ली जाने के लिए राजी नहीं हो रहे। वह खुद 10 दिन दिल्ली में किसानों के साथ समर्थन देकर अबोहर वापस आया है, लेकिन दिल्ली में उसे तब हैरानी नजर आई, जब अबोहर इलाके के ज्यादा से ज्यादा 200 किसान प्रदर्शन में दिखाई दिए।
उन्होंने अपील की कि अगर यह संघर्ष आगे बढ़ता है तो अबोहर इलाके के किसानों को इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए क्योंकि अगर यह कृषि कानून लागू हो गया तो अबोहर इलाके के किसानों को भी उतना ही असर पड़ेगा, जितना कि पूरे देश के किसानों को।
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December 09, 2020 at 04:00AM
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