Amazon

Wednesday, December 9, 2020

कृषि कानूनों के खिलाफ भारत बंद ,शहर का किसानों को आधे दिन का पूर्ण समर्थन

‘जट्‌ट की जमीन हुंदी मां दिल्लीए.... रोल ’ता किसान थां-थां दिल्लीए।’ जैसे ही ये जोशीला गीत ट्रैक्टर के स्पीकर पर बजा तो पूरी कतार में ट्रैक्टरों पर चढ़े युवा इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाने लगे। किसान संंगठनों के अलावा वाम संगठनों का लाल झंडा और कांग्रेस के संगठन इंटक के नारे लगते रहे। सुबह से दोपहर 3 बजे तक सिटी के अंदर का माहौल किसान आंदोलन से रमा रहा।

सिटी में सभी बाजार, फैक्ट्रियों से लेकर शैक्षणिक संस्थान, पब्लिक ट्रांसपोर्ट बंद रहे। सिटी में 40 हजार से अधिक दुकानें, 15 हजार के करीब कारखानों की मशीनें बंद रहीं। किसान संगठनों ने नेशनल हाईवे और मंडियों के बाहर ट्रैफिक रोककर धरने दिए लेकिन जालंधर सिटी के अंदर ट्रैफिक में कोई बाधा नहीं रही। बंद को जहां जालंधरियों ने खुला समर्थन दिया, वहीं दूध-सब्जी-पेट्रोल से लेकर रोजाना इस्तेमाल की हर चीज उपलब्ध रही। सभी सरकारी दफ्तर खुले लेकिन लोगों के काम नहीं हो सके। विभिन्न संगठनों ने कहा कि वे पूरी तरह किसानों के साथ हैं, इसीलिए दोपहर 3 बजे तक पूरा कारोबार बंद रखा।

उधर, पुराने बाजारों में बड़ी संख्या में शाम को भी दुकानें बंद रही क्योंकि उनके संचालक आए ही नहीं। इंडस्ट्री ने रविवार को पीएसपीसीएल से तारों के रखरखाव के लिए कट न लगाने के लिए संपर्क किया है ताकि जो काम आज रुक आ रहा है, उसको रविवार को फैक्ट्री चला कर पूरा किया जा सके। बंद के दौरान बैंक, डीसी दफ्तर, पोस्ट ऑफिस, पासपोर्ट दफ्तर, सेहत सेवाएं मिलती रहीं जबकि सभी बाजार, बसें, होटल-मॉल, शिक्षण संस्थान और मंडियां बंद रहीं।

यादगार हाल से निकाली संगठनों ने रैली

अकसर बंद की काॅल होने पर लोग चोरी-छुपे दुकानें खोलने की कोशिश में रहते हैं लेकिन मंगलवार को स्थिति एकदम बदली हुई दिखी। आम भावना रही है कि जो दुकान खोलेगा, ये उसकी सामाजिक तौर पर गैर जिम्मेदाराना हरकत होगी। पहली बार फोकल पाॅइंट में 100 फीसदीa फैक्ट्रियां दोपहर 3 बजे तक बंद दिखीं। प्रेसिडेंट नरेंद्र सग्गू की अगुआई में एक फ्लैक्स बोर्ड लगाकर लिखा गया था- हम किसानों के संघर्ष का समर्थन करते हैं। दूसरी तरफ किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान सिटी के कुछ लोग पानी की बोतलें वितरित करते दिखे।

देश भगत यादगार हाल से वाम संगठनों की विशाल रैली निकली। जालंधर की किसान सभा के सदस्य शहर का भ्रमण करते रहे लेकिन जो संस्थान खुले थे, उन्हें जबरदस्ती बंद नहीं करवाया। केवल पीएपी चौक, किशनगढ़, मंडी के गेट के सामने, ब्यास, करतारपुर, शाहकोट-मलसियां आदि में प्रमुख सड़कें ही ब्लाॅक की गई थीं। बंद के दौरान शांति रही, कहीं अप्रिय घटना नहीं हुई।

बंद से पहले और बाद में चलीं 20 बसें
भारत बंद के मद्देनजर पंजाब रोडवेज की बसों का चक्का जाम रहा। सुबह करीब 8:30 बजे तक सिर्फ 8 बसें अमृतसर और लुधियाना के लिए जालंधर बस स्टैंड से रवाना हुईं। फिर 3 बजे के बाद दर्जनभर सरकारी और प्राइवेट बसें रवाना हुईं। बस स्टैंड यात्रियों के बिना सूना रहा।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
India closed against agricultural laws, city farmers have full half-day support

https://ift.tt/39WM2dQ
December 09, 2020 at 04:25AM

No comments:

Post a Comment