मरीजों को इलाज के लिए इमरजेंसी में अस्पताल पहुंचाने वाली 108 एंबुलेंस गाड़ियां खुद बीमार हो चुकी हैं, जिनको तत्काल इलाज की सख्त जरूरत है।
इन कंडम हो चुकी एंबुलेंस गाड़ियों की घटिया हालत को देखकर अब मरीज भी इसमें बैठने से कतराने लगे हैं।
जिले ही नहीं सूबेभर में फैला 108 का बेड़े की गाड़ियां ज्यादातर खटारा हो चुकी हैं। हालांकि संचालक कंपनी इन्हीं से जैसे-तैसे काम चला रही है, लेकिन सरकार इस तरफ गंभीर नहीं है, जो लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है।
खस्ता हुई गाड़ियों की हालत:
कंपनी के स्टेट हेड सैकत मुखर्जी मुखर्जी ने बताया कि 10 सालों में एक-एक गाड़ी ने औसतन 4.5 से 5.0 लाख किमी का सफर किया है, जबकि मियाद 2.5 से 3.0 लाख किमी होती है।
इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्थिति कैसी होगी। वह बताते हैं कि मरीजों को दिक्कत नहीं आने देते गाड़ी खराब होती है तो तत्काल दूसरी भेज दी जाती है लेकिन इससे समय और मैन पावर दोनों की बर्बादी होती है।
गाड़ियां मेंटीनेंस और सर्विस के चलते काम कर रही हैं अन्यथा काम के लायक नहीं हैं।
सेहत सेवाओं की बेहतरी को 10 साल पहले शुरुआत
10 साल पहले अर्थात साल 2010 में तत्कालीन अकाली-भाजपा सरकार के दौर में अमृतसर समेत सूबे के हरेक जिले के लिए कुल 242 डायल 108 गाड़ियां उतारी गई थीं।
इनका काम एक्सीडेंट, डिलीवरी, बर्न मामले, हार्ट अटैक जैसे इमरजेंसी के मरीजों को अस्पताल पहुंचाना रहा है, ताकि उनको समय से इलाज मिल सके।
इन गाड़ियों के चलाने का जिम्मा जकित्जा हेल्थ केयर लिमिटेड को दिया गया था। तभी से यह कंपनी इस काम को अंजाम दे रही है। इधर कोरोना काल में भी इन गाड़ियों के बेड़े ने काफी काम किया है।
अब तक सिर्फ 80 हुईं रिप्लेस:
साल 2019 में बड़ी आवाज उठाने के बाद सरकार ने 80 गाड़ियों को रिप्लेस किया था। बाकी वैसे ही चल रही हैं। कोरोना काल में इन गाड़ियों पर जिम्मेदारी बढ़ी है ऐसे में इनका नवीनीकरण होना बेहद जरूरी है।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
https://ift.tt/2Dl6ZAV
July 09, 2020 at 04:49AM
No comments:
Post a Comment