कोरोनावायरस ने शहर के 14 लाख लोगों के रहने, खाने और जीने का नजरिया बदल दिया है। हालांकि सरकार ने 23 जून को होटल और रेस्टोरेंटों को खोलने की अनुमति देे दी है, इसके बावजूद कोरोना के चलते यहां पर लोग अपने परिवार के साथ आने या फिर वैवाहिक पार्टियां करने से डर रहे हैं।
संक्रमण से इतने डरे हैं कि शहर के 82 से 84 फीसदी लोगों ने होटल, रेस्टाेरेंट और सिनेमा, पब, बार का रास्ता ही छोड़ दिया है। वहीं, 20 से 23 प्रतिशत लोगों का रुटीन में आवागमन बढ़ा है। यह खुलासा केंद्रीय पर्यावरण संस्थान और पर्यावरण विज्ञान विभाग (सीएसई) की ओर से लाॅकडाउन के दौरान हुए सर्वे में हुआ है।
अपनों का साथ ज्यादा सुरक्षित
लॉकडाउन का असर शहर के 150 मैरिज पैलेस, 80 होटल, 250 रेस्तरां पर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। मतलब साफ है कि अब होटल, सिनेमा या फिर रेस्टोरेंट जाने के बजाय लोग अपने आसपास के रिश्तेदारों या फिर परिचितों के यहां जाना अधिक पसंद कर रहे हैं। अपनों का साथ लोगों को अधिक सुरक्षित लग रहा है। सर्वे में यह भी क्लियर हुआ है कि ज्यादातर शहरियों ने अपनी गतिविधियों को आसपास तक ही सीमित कर लिया है।
बच्चे-बुजुर्ग कर रहे सरकार की एडवाइजरी का पालन
खास बात यह है कि सरकार की एडवाइजरी का पालन शहर के बच्चे और बुजुर्ग पूरी तरह से कर रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान जो लोग सुबह-शाम पार्कों में टहलने आते थे, उनमें करीब 60 फीसदी की कमी आई है। अध्ययन में पाया गया कि पार्को में सुबह और शाम की सैर काफी कम हो गई है। वहीं लॉकडाउन के दौरान सरकारी कार्यालय बंद होने के चलते यहां से होकर आने-जाने वाले लोगों में सबसे अधिक 80 से 81 फीसदी की कमी देखी गई है। होटल एसोसिएशन के सदस्य ज्ञान ठाकुर का कहना है कि चूंकि हाेटल खुलने का समय रात 8 बजे तक है, इसलिए भी कम लोग अभी होटलों में आ रहे हैं, उनका कहना है कि ज्यादातर लोग रात को होटल में जाते हैं।
बाहर आना-जाना घटाया प्राइवेट कॉलेज में प्रोफेसर प्रियंका ने बताया कि हफ्ते में कम से कम एक दिन बाहर खाना खाने जाते थे लेकिन अब घर में बना ही खा रहे हैं। सीए इंद्रजीत सिंह ने कहा कि मेक्सिमम ऑनलाइन काम हो रहा है और बाहर वालों से दूरी भी बना ली है। 30 साल से रोज सुबह सैर करने वाली 68 साल की उर्मिला ने बताया कि अब घर के अंदर या छत पर ही सैर करती हैं।
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June 28, 2020 at 05:11AM
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