जिला मुख्यालय को एनएच 344-ए के फोरलेन प्रोजेक्ट के जरिए बाईपास देकर बाहरी ट्रैफिक से निजात दिलाने के उद्देश्य चल रहा काम हाई वोल्टेज खंभों के कारण आगे नहीं बढ़ पा रहा है। हालांकि दो बार परमिट लेकर काम किया गया है, मगर बताते हैं कि चार घंटे के परमिट में दो घंटे तो खंभों पर चढ़ने-उतरने पर ही बर्बाद हो जाते हैं, िजसके चलते काम पूरा नहीं हो पा रहा है। जबकि दूसरी तरफ पावर ट्रांसको अधिकारियों की बात करें तो काम को जल्द पूरा करने की बात कही जा रही है।
बता दें कि गढ़शंकर रोड पर जिन 66 केवीए तारों वाले खंभों की बात की जा रही है। जमीन से उनकी ऊंचाई करीब 18 मीटर है, जबकि जमीन से 12 मीटर की उंचाई पर जाकर ही निचले स्तर पर तारें लगी हैं। ऊंचाई अधिक होने की वजह से टावरनुमा खंभों पर चढ़ने व उतरने में ही अधिक समय लग रहा है, जिसके चलते काम उस गति से नहीं चल पा रहा, जिस गति में कम ऊंचाई वाले खंभों पर तारें लगाने या उतारने में काम निपट जाता है।
तारों का काम पूरा होने पर ही बन सकेगा सड़क का ज्वाइंट पुल
गांव लंगड़ोआ से महालों तक के करीब 10 किलोमीटर लंबे बाईपास पर गढ़शंकर रोड से हाईवोल्टेज तारों को हटाने का काम पूरा होने पर ही बाईपास गढ़शंकर रोड के दोनों तरफ के बाइपास को जोड़ने वाला पुल बन पाएगा। जिसके चलते बाईपास के महालों की तरफ वाले हिस्से को लंगड़ोया की तरफ के हिस्से के साथ जुड़ जाएंगे। इस पुल के बनने से ही बाईपास पूरी तरह से ट्रैफिक के लिए खोल दिया जाएगा। बता दें कि गढ़शंकर रोड पर निर्माणाधीन बाईपास के ऊपर से हाईवोल्टेज तारें गुजरती हैं। जिसके चलते इस हिस्से के पुल का काम अभी अधूरा है।
ऐसे में बाईपास से गुजरने वाले वाहन सर्विस लेन से होकर गुजरते हैं। इसी वजह से बाहर से आने वाले वाहन चालक बाईपास की भूल भुलैया में जाने की बजाए शहर के सीधे रास्ते से ही जाना सही समझते, जिसके कारण बाईपास शुरू होने के बावजूद शहरी क्षेत्र ट्रैफिक से मुक्त नहीं हो पाया। जिसके चलते प्रशासन व कंस्ट्रक्शन कंपनी पर बाईपास का काम जल्द से जल्द पूरा करवाने का दबाव बढ़ता जा रहा है। इसी वजह से हाईवोल्टेज तारों को शिफ्ट करने के लिए कंपनी की ओर से तेजी लाई जा रही है।
काम में आती रही अड़चनें
रोपड़ से फगवाड़ा तक के नेशनल हाईवे 344-ए के फोरलेन प्रोजेक्ट के तहत बन रहे लंगड़ोया-महालों बाईपास के निर्माण में बीते समय से ही मुश्किलें सामने आ रही हैं। जिस वजह से यह कार्य हमेशा ही रुकता रहा है। बाइपास के लिए जमीन एक्वायर करने में प्रशासन को खासी मुश्किलें पेश आई। यही नहीं बरनाला गांव में जमीनों की कीमत को लेकर भी मामला सामने आया। जिसके चलते करीब एक साल तक गांव बरनाला क्षेत्र में जमीन एक्वायर का काम रुका रहा, साथ-साथ पूरे क्षेत्र में अवार्ड का काम भी रुक गया। जिसके चलते करीब डेढ़ साल तक काम रुका रहा। अब काम शुरू हुआ तो यहां हाई वोल्टेज तारों की वजह से काम रुक गया। जो अभी तक रुका पड़ा है। हालांकि अब तारें शिफ्ट करने का काम शुरू किया गया है व उम्मीद है कि जल्द ही यहां तारों को कनेक्ट करके पुल का काम शुरू करवाया जाएगा।
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June 28, 2020 at 05:00AM
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