सिटी की सड़कों से लेकर गली-मोहल्ले में डेढ़ साल से छाया अंधेरा दूर होने के आसार नजर आने लगे हैं। स्मार्ट सिटी के तहत एलईडी लाइट के प्रोजेक्ट का टेंडर प्रोसेस बुधवार को पूरा हो गया। गुड़गांव की एचपीएल कंपनी ऑनलाइन फाइनेंशियल बिड में 49 करोड़ के प्रोजेक्ट के लिए सबसे कम बोली देकर टेंडर लेने में कामयाब रही। एचपीएल ने 11.34 फीसदी का लेस देकर 44.82 करोड़ में प्रोजेक्ट का टेंडर लिया है।
स्मार्ट सिटी के सीईओ निगम कमिश्नर करनेश शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को बिड की रिपोर्ट बनाकर सरकार को मंजूरी के लिए भेजी जाएगी। मंजूरी मिलते ही कंपनी को टेंडर का वर्कऑर्डर देंगे, ताकि 60, 000 नई एलईडी स्ट्रीट लाइटें लगाने का काम शुरू हो सके। इस प्रक्रिया में 20 दिन का समय लगेगा, इसलिए उनकी कोशिश है कि कम से कम एक माह में सिटी में लाइटें लगाने का काम शुरू हो जाए।
सीईओ करनेश शर्मा ने बताया कि प्रोजेक्ट के लिए एक साल का समय निर्धारित किया गया है। लेकिन लोगों की परेशानी को देखते हुए सिटी के चारों विधानसभा हलकों में अर्थात मल्टी कॉर्नर लेवल पर काम शुरू कराया जाएगा, ताकि 8 माह में काम खत्म हो जाए। नए प्रोजेक्ट में ठेका कंपनी सिटी के साथ निगम दायरे में शामिल किए गए कैंट हलके के 11 गांवों में भी एलईडी लाइटें लगाएगी। कंपनी पूरे प्रोजेक्ट का 5 साल तक ऑपरेशन एंड मेंटनेंस का भी काम देखेगी।
नए प्रोजेक्ट के खिलाफ हाईकोर्ट जाएगी पीसीपी कंपनी
अकाली दल-भाजपा सरकार के कार्यकाल में 10 साल के लिए 274 करोड़ की लागत वाला एलईडी लाइट का प्रोजेक्ट निगम में कांग्रेस का मेयर बनने के बाद रद्द कर दिया गया था। कंपनी सिटी के मेन रोड पर 5500 एलईडी लाइटें भी लगा चुका है, जो अब निगम के कंट्रोल में है। प्रोजेक्ट का एग्रीमेंट रद्द करने के बाद कंपनी ने आर्बिट्रेशन में निगम के ऊपर प्रोजेक्ट पर खर्च 8.50 करोड़ रुपए देने का दावा कर रखा है। स्मार्ट सिटी के तहत नए एलईडी लाइट के प्रोजेक्ट का टेंडर होते ही नया विवाद खड़ा हो गया है। निगम द्वारा रद किए गए पुराने प्रोजेक्ट की ठेका कंपनी चंडीगढ की पीसीपी कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर ओंकार सिंह ने कहा कि कंपनी ने सारी तैयारी कर ली है, जल्द ही नए प्रोजेक्ट को लेकर हाईकोर्ट में रिट दायर करेंगे।
हालांकि पीसीपी इंटरनेशन प्रोजेक्ट रद होने को लेकर आर्बिट्रेशन में पहले ही निगम पर केस कर चुकी है। प्रोजेक्ट मैनेजर का कहना है कि उनके प्रोजेक्ट की बेसिक टेंडर वेल्यू 40 करोड़ थी, जबकि नए प्रोजेक्ट की बेसिक वैल्यू 49.23 करोड़ है। उन्होंने सिटी में 65028 लाइटें लगाना था, जिसमें से 5008 लाइटें सिटी की मेन रोड पर लगा चुके हैं। पुराने प्रोजेक्ट में ठेका कंपनी ने 10 साल के ऑपरेशन एंड मेंटनेंस का काम करना था, जबकि नए ठेके में सिर्फ 5 साल के मेंटनेंस और ऑपरेशन का काम दिया गया है। इतना ही नहीं पीसीपी कंपनी के साथ निगम के हुए एग्रीमेंट में कहा गया है कि किसी प्रकार विवाद होने की स्थिति में निपटारा होने तक किसी दूसरे को यह काम नहीं दिया जा सकता है। एग्रीमेंट रद करने का केस आर्बिटेशन में चल रहा है, ऐसे में जालंधर में ही एलईउी लाइट का प्रोजेक्ट किसी दूसरी कंपनी को देना एग्रीमेंट की शर्त के विपरीत है। ओंकार सिंह का कहना है कि वो इन सब दावों के आधार पर हाईकोर्ट में केस कर नए प्रोजेक्ट पर स्टे की मांग करेंगे।
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June 26, 2020 at 04:58AM
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