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Friday, June 26, 2020

सीबीएसई ने 10वीं और 12वीं के बचे पेपर किए रद्द कंफ्यूजन में स्टूडेंट्स, बाेले- हमारी मेहनत व्यर्थ गई

सेंट्रल बाेर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन द्वारा काेराेना वायरस के बढ़ते संक्रमण काे देखते हुए 10वीं और 12वीं क्लास के बाकी बचे पेपर रद्द करने का फैसला लिया गया है, लेकिन इस फैसले से ज्यादातर स्टूडेंट्स और अभिभावक खुश नहीं हैं।उनका कहना है कि नाॅन मेडिकल और मेडिकल की सभी परीक्षाएं हाे गई थी। अब उनकी मेहनत बेकार जाएगी।

बाेर्ड के फैसले अनुसार अब स्टूडेंट्स की असेसमेंट उनके पिछले 3 एग्जाम के आधार पर होगी, जोकि स्कूल की ओर से भेजा जाएगा। वे बचे हुए पेपर हालात सुधरने के बाद भी दे सकेंगे। ताकि अपना रिजल्ट सुधार सकें। स्टूडेंट्स का कहना है कि कई राज्यों में बाेर्ड रिजल्ट आ गए हैं और हमारे इंटरनल असेसमेंट के आधार पर मार्क्स आएंगे। अगर हम रिजल्ट सुधारना चाहते हैं ताे उसके लिए इंतजार करना पड़ेगा। ताे हम अच्छे काॅलेज में दाखिला कब तक लेंगे और कैसे लेंगे। दूसरी तरफ आईएसई की भी बाकी बची परीक्षाएं रद्द कर दी गई है।

स्टूडेंट्स का रिएक्शन- हालात के हिसाब से सही, लेकिन इस फैसले से खुश नहीं

स्टूडेंट नवदीप ने कहा कि जिस तरह के हालात हैं, उसे देखकर लगता है कि परीक्षाएं रद्द ही हाेनी चाहिए थी। चूंकि काेई भी पेरेंट्स अपने बच्चाें की जान काे जाेखिम में नहीं डालना चाहता। लेकिन फैसले से ज्यादा संतुष्टि नहीं हुई। ऐसा लग रहा है कि सारी मेहनत व्यर्थ हाे गई। स्कूल अपनी असेसमेंट लगाएगा, ऐसे में क्या ट्रांसपेरेंसी रहेगी। वे ताे अपने हिसाब से अंक देंगे।

स्टूडेंट मिताली ने कहा कि पेपर देते हुए एक भी बच्चा बीमार हाे जाता ताे हालात और खराब हाे जाते। लेकिन अभी जैसे बाेर्ड की ओर से कहा गया है कि जाे स्टूडेंट्स अपने अंक से संतुष्ट नहीं है, वे बाद में परीक्षा दे पाएंगे। स्टूडेंट्स अब कितना इंतजार करेंगे। हालात पता नहीं कब सही हाेंगे। ऐसे में अच्छे काॅलेज में दाखिला कैसे लेंगे। सब कंफ्यूजन सा हाे गया है।

पेरेंट्स चिंतित, कहा- परीक्षाएं रद्द होने से कहीं बच्चाें का भविष्य न खराब हाे

हालांकि पहले पेरेंट्स ही ये चाहते थे कि ऐसे समय में बच्चाें की परीक्षाएं न ली जाएं, लेकिन पेपर रद्द करने के फैसले पर कुछ अभिभावक चिंतित हैं। उनका कहना है कि अभी बच्चे एक-दूसरे से यही पूछ रहे हैं कि पेपर बाद में देने है या क्या करना हैं। जिन स्टूडेंट्स काे ग्रेजुएशन में एंट्रेंस एग्जाम के आधार पर एडमिशन लेना है, उन्हें कोई खास दिक्कत नहीं होगी। लेकिन, जिनका एडमिशन मैरिट के आधार पर होगा, उनके लिए जनरल प्रमोशन परेशानी खड़ी कर सकता है। अभिभावक यादव खाेसला ने कहा कि मेरे बेटे का केवल बिजनेस स्टडीज का एग्जाम रह गया था। जनरल प्रमोशन होने से उसके करियर प्लान पर सीधे तौर पर कोई असर नहीं होगा। हां, ये जरूर है कि जिस सब्जेक्ट का पेपर बचा है, वही स्कोरिंग हो सकता था। इससे फाइनल स्कोर पर विपरीत असर पड़ेगा।

कंपीटिटिव एग्जाम के बारे में अभी काेई फैसला नहीं

  • जेईई मेन- 18 से 23 जुलाई परीक्षा हाेनी है। इसे क्लियर करने के बाद स्टूडेंट्स जेईई एडवांस की परीक्षा देते हैं। जेईई मेन के जरिए एनआईटी, सरकारी और प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन मिलता है। शहर से करीब 12 हजार स्टूडेंट्स ये परीक्षा देंगे।
  • नीट - 26 जुलाई काे परीक्षा हाेनी है। इसके जरिए सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस और बीडीएस में एडमिशन मिलता है। शहर से करीब पांच हजार स्टूडेंट्स ये परीक्षा देेते हैं।
  • जेईई (एडवांस्ड)- 23 अगस्त काे परीक्षा हाेनी है। इसके जरिए 23 आईआईटी में एडमिशन मिलता है। शहर से करीब 7 हजार स्टूडेंट्स ही जेईई एडवांस के लिए क्वालीफाई कर पाते हैं।

प्रिंसिपल बाेले - विद्यार्थी घबराएं नहीं, बाेर्ड का फैसला ठीक

- पुलिस डीएवी पब्लिक स्कूल की प्रि. डाॅ. रश्मि विज ने कहा कि फैसला अच्छा हैं। चूंकि स्टूडेंट्स के लिए बाद में पेपर देने का भी ऑप्शन रखा गया है। दरअसल ये हालात ऐसे हैं कि आप इसमें सही-गलत नहीं कह सकते, बल्कि इन हालाताेें में काेई नहीं चाहता कि बच्चाें की जान जाेखिम में डाली जाए। 3 महीने से बच्चे मानसिक तनाव में चल रहे थे कि क्या हाेगा, पेपर हाेगा या नहीं। ऐसे में बाेर्ड की ओर से उनकी परेशानी काे दूर कर दिया गया है।

- एमजीएन अर्बन एस्टेट के प्रिंसिपल जतिंदर सिंह ने कहा कि बाेर्ड का फैसला ठीक है। चूंकि स्कूल प्रबंधकों द्वारा बच्चाें काे साेशल डिस्टेंस का पालन करवाना मुश्किल हाे जाता। ऐसे में अगर एक भी बच्चा बीमार हाे जाता ताे और मुश्किल खड़ी हाे जाती। दरअसल इस समय आपकी सेहत महत्वपूर्ण हैं, परीक्षाएं नहीं। इन हालाताें में कुछ न कुछ फैसला ताे करना ही था। स्टूडेंट्स घबराएं नहीं।





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June 26, 2020 at 04:25AM

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