करीब डेढ़ साल पहले स्वामी सत्यानन्द महाराज के प्रवचन से प्रेरित होकर हिसार के न्यू ऋषि नगर में रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता व भगवान परशुराम जन सेवा समिति के संस्थापक याेगेंद्र कुमार शर्मा ने अस्तित्व बचाने के लिए जूझ रही घराें के आंगन से गायब हाेती गाैरेया चिड़िया काे बचाने की ठानी। जिसके लिए उन्हाेंने तोशाम में जाकर चिड़िया और गाैरेया के लिए लकड़ी के घाैसले बनवाए। अपने घर के साथ-साथ काॅलाेनी, सातराेड कलां, आदर्श नगर और सेक्टर 14 के विभिन्न स्थानाें पर 400 घौसले लगवाए। प्रतिदिन खुद ही सुबह और शाम चिड़ियाें के लिए घाैसले के पास दाना और सकोरे में पानी की व्यवस्था करते हैं। अब प्रत्येक जगह पर आंगन में गाेरैया व अन्य चिड़िया अठखेलियां करती नजर आती हैं। अन्य लाेगाें काे भी पक्षियाें काे बचाने की अपील याेगेंद्र शर्मा व उनके परिवार के सदस्य कर रहे हैं।
याेगेंद्र कुमार के भाई नरेंद्र कुमार व पिता मदनलाल शर्मा ने बताया कि करीब डेढ़ साल पूर्व ही महाराज जी ने लुप्त हाेती जा रही गाैरेया काे बचाने की अपील प्रवचन के माध्यम से की थी। प्रवचन से प्रेरित होकर परिवार के सभी सदस्याें के सहयाेग से भाई ने 150 रुपये में एक लकड़ी का घाैसला तैयार कराया। जिन्हें विभिन्न स्थानाें पर घराें के बाहर लगाया गया। अब स्थिति यह है कि जागरूक होकर लाेग खुद भी पक्षियाें के लिए दाना-पानी का इंतजाम करने लगे हैं। फेसबुक व साेशल मीडिया पर भी गाैरेया काे बचाने की अपील की जाती है। अब लगने लगा है कि पहले की तरह ही गाैरेया फिर से वापस आ गई है।
लाॅकडाउन में खुद कर रहे थे दाना-पानी का इंतजाम
याेगेंद्र कुमार बताते हैं कि पक्षियाें काे फिर से उनका आशियाना मिलने के बाद मन काे जाे खुशी मिलीं, उसे शब्दाें में बयां नहीं किया जा सकता है। वह लाॅकडाउन के दाैरान भी अन्य लाेगाें के सहयाेग से गाैरैया व अन्य चिड़ियों के लिए दाना-पानी का इंतजाम कर रहे थे। बताया कि हालांकि अब लाेग भी पक्षियाें काे बचाने के लिए आगे आए हैं।
शहरीकरण ने छीन लिया आशियाना
याेगेंद्र बताते हैं शहरीकरण ने घराें के आंगन में फुदकने वाली चिड़िया और गाैरेया का आशियाना छीन लिया था। क्याेंकि अब लाेग नए घर बनाते हैं ताे उनमें पक्षियाें के लिए अलग से जगह नहीं छुड़वाई जाती है। जिसके कारण अब घराें के अंदर कबूतर भी नहीं आते हैं। लाेगाें से अपील है घर के बाहर पक्षियाें के लिए घाैसला जरूर रखवाएं।
^याेगेंद्र व परिवार के सदस्याें से अन्य लाेगाें काे भी सीख लेनी चाहिए। पक्षियाें काे बचाने और उनके दाना-पानी का इंतजाम करने सबको आगे आना चाहिए।
-पवन ग्राेवर, डीएफओ, वन्य प्राणी विभाग।
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दैनिक भास्कर,,1733
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