कोरोना महामारी के बीच फिलहाल पहली जुलाई से शुरू होने वाली सिर्फ फाइनल ईयर के लास्ट सेमेस्टर (टर्मिनल एग्जाम) की परीक्षाएं टल सकती हैं।
यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने पहले स्टूडेंट्स, टीचर्स और फिर यूनिवर्सिटीज की ओर से बन रहे दबाव को देखकर विगत दिशा-निर्देशों में संशोधन करने का फैसला लिया है।
जानकारी के अनुसार गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी की तयशुदा परीक्षाएं भी स्थगित हो सकती हैं या फिर न ही ली जाएं। गौर हो कि यूनिवर्सिटी ने कोरोना संक्रमण के चलते क्लासेज बंद करके अॉनलाइन पढ़ाई शुरू करवाई थी और स्टूडेंट्स को भी घर भेज दिया था।
बाद में यूजीसी की गाइडलाइंस के मुताबिक सिर्फ टर्मिनल एग्जाम लिए जाने का फैसला लिया था और उसकी तिथि पहली जुलाई तय की गई थी।
चूंकि कोरोना का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। ऐसे में स्टूडेंट्स का परीक्षा देने आ पाना मुश्किल तो है ही, बल्कि तैयारियां भी नहीं हुई हैं। यही कारण रहा कि स्टूडेंट्स की तरफ से इसका विरोध भी किया गया था।
तदोपरांत गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी ने सिंडीकेट की बैैठक में परीक्षाओं का सारा दारोमदार यूजीसी पर डाल दिया था।
इधर, यूजीसी ने बुधवार को कोरोना के चलते हरियाणा, मध्य प्रदेश की परीक्षाएं न लेकर स्टूडेंट्स को सीधे परमोट करने का फैसला लिया है। कमीशन ने फैसला लिया है कि विगत के निर्देशों में फिर से संशोधन होगा।
यूनिवर्सिटी ने यूजीसी पर छोड़ा फैसला, जैसा कहेगी वैसा होगा
जीएनडीयू की भी परीक्षाएं या तो आगे बढ़ेंगी या फिर उक्त राज्यों की तर्ज पर स्टूडेंट परमोट किए जा सकते हैं। इस संदर्भ में यूनिवर्सिटी के परीक्षा इंचार्ज डॉ. मनोज कुमार का कहना है कि उनकी यूनिवर्सिटी ने इसका फैसला यूजीसी पर छोड़ा है, वह जैसा कहेगी वैसा होगा।
स्टूडेंट नेता विजय और टीचर नेता प्रो. एचएस वालिया का कहना है कि कमीशन और यूनिवर्सिटी दोनों को कोरोना काल में परीक्षाएं रद्द करनी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि जो विद्यार्थी लॉकडाउन के कारण अप्लाई नहीं कर पाए, उनको इसका लाभ दिया जाए।
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June 25, 2020 at 04:52AM
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