विजिलेंस ब्यूरो की अमृतसर रेंज ने कोरोना मरीजों की गलत रिपोर्टें देने पर तुली डायग्नोस्टिक सेंटर के डाॅ. रॉबिन तुली, ईएमसी अस्पताल के मालिक, डाॅक्टर सहित 6 लोगों के खिलाफ हत्या प्रयास-धोखाधड़ी व अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।
यह कार्रवाई शिकायतकर्ता राज कुमार खुल्लर, वरिंदर दत्ता उर्फ विक्की और अशोक तनेजा की शिकायत पर पर की गई है। इसमें तुली लैब के डाॅ. मोहिंदर सिंह, डाॅ. रिद्धुम तुली, डाॅ. संजय पिपलानी और डाॅ. रॉबिन तुली, ईएमसी के मालिक पवन अरोड़ा और ईएमसी के डाॅ. पंकज सोनी को नामजद किया गया है।
इन सभी पर मिलीभगत करके धोखे से पैसा कमाने की खातिर निगेटिव मरीजों को पाॅजीटिव बताकर अन्य कोरोना पाॅजीटिव मरीजों के साथ रखकर उनकी जान खतरे में डालने का आरोप लगा है।
एफआईआर के मुताबिक तुली लैब पर ज्यादा पैसे लेकर कम पैसों की रसीद देने के आरोप भी लगाए गए हैं। विजिलेंस ब्यूरो की तरफ से दर्ज एफआईआर के मुताबिक 20 जून 2020 को एसएसपी विजिलेंस ब्यूरो रेंज अमृतसर दफ्तर को मिली शिकायतों की पड़ताल के सिलसिले में शिकायतकर्ता आए थे।
इसके बाद विभिन्न पुलिस पार्टियों के साथ तुली लैब और ईएमसी अस्पताल की चेकिंग की गई और तुली लैब से कोविड-19 टेस्ट करने वाली मशीन को सील किया गया, ताकि उसके साथ छेड़छाड़ न की जा सके।वहीं वहां से रिकार्ड लेकर पड़ताल की गई।
हत्या प्रयास समेत कई संगीन धाराएं लगाईं, टेस्ट के 5500से 6500 रुपए वसूलकर 4500 की ही रसीद दी जाती थी
एफआईआर के मुताबिक अशोक तनेजा निवासी मेहता चौक ने शिकायत में बताया कि वह 26 मई को पत्नी और बेटे के साथ इंग्लैंड से अमृतसर आए थे। उन्होंने होटल ताज में एकांतवास किया।
इसके बाद उन्होंने कोरोना टेस्ट तुली लैब से करवाए, जहां से उनसे 5500 रुपए प्रति टेस्ट वसूल किए गए और रसीद 4500 रुपए प्रति टेस्ट की दी गई। तुली लैब की तरफ से अशोक तनेजा और उसके बेटे की रिपोर्ट पॉजीटिव और पत्नी की रिपोर्ट निगेटिव दी गई।
इसके बाद दोनों 31 मई को ईएमसी अस्पताल में दाखिल हो गए। उनके बार-बार कहने पर भी ईएमसी अस्पताल की तरफ से उनका कोरोना री टेस्ट नहीं करवाया गया।। इसके बाद उनके बार-बार कहने पर 6 जून को दूसरी लैब से टेस्ट करवाए गए तो उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई।
इसके बाद दोबारा से 6 जून को उन्होंने सरकारी मेडिकल कालेज की लैब से टेस्ट करवाया तो फिर रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके अलावा जंडियाला के सुनील से भी तुली लैब ने टेस्ट के 6500 रुपये आरटीजीएस के जरिए लिए थे और उन्हें 4500 रुपये की रसीद दी थी।
6 जून को महिला पॉजीटिव, 7 को निगेटिव
विजिलेंस ब्यूरो की तरफ से दर्ज एफआईआर के मुताबिक राजकुमार खुल्लर निवासी रानी का बाग की शिकायत की पड़ताल में पाया गया कि शिकायतकर्ता की गर्भवती डाॅक्टर बहू का इलाज पहले से ही अपोलो अस्पताल में चल रहा था।
अपोलो अस्पताल की तरफ से डिलीवरी के लिए उसे दाखिल करने से पहले उसको तुली लैब से टेस्ट करवाने को कहा। जिसपर उसने 6 जून 2020 को तुली लैब से टेस्ट करवाया तो उसकी कोरोना रिपोर्ट पॉजीटिव आई।
इसके बाद उसे गुरु नानक देव अस्पताल में कोरोना आइसोलेशन वार्ड में बाकी पॉजीटिव मरीजों के साथ रखा गया। महिला डाॅक्टर के परिवार ने शक होने पर 7 जून 2020 को सरकारी मेडिकल काॅलेज की लैब से दोबारा उसका टेस्ट करवाया, जिसकी रिपोर्ट निगेटिव आई।
पॉजीटिव मरीजों के साथ रखे स्वस्थ लोग, जिससे उनकी जान का खतरा पैदा हुआ
वरिंदर दत्ता उफ विक्की निवासी किला भंगियां नमक मंडी ने भी बताया कि तुली लैब और ईएमसी अस्पताल के मालिक और डाॅक्टरों ने मिलीभगत करके उसके ससुराल परिवार और उसकी पत्नी का कोरोना टेस्ट की गलत पॉजीटिव रिपोर्ट दी है।
इसके कारण उसके पारिवारिक मेंबरों को ईएमसी अस्पताल के कोविड आइसोलेशन ब्लाॅक में अन्य कोरोना पॉजीटिव मरीजों के साथ रखा गया। जहां उसके परिवार के सदस्य दूसरे कोरोना पॉजीटिव मरीजों के संपर्क में आने के कारण कोरोना पॉजीटिव हो गए।
तुली लैब और ईएमसी अस्पताल के मालिक, डाॅक्टरों और स्टाफ ने लालच में आकर जानबूझ कर वरिंदर दत्ता उर्फ विक्की के पारिवारिक मेंबरों के साथ ऐसा करके उनकी जान को खतरे में डाला है।
सेहत विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की भी मिलीभगत
विजिलेंस ब्यूरो की प्रारंभिक जांच में सेहत विभाग के सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की भी मिलीभगत का अंदेशा भी जताया गया है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार कोरोना महामारी के प्रकोप के दौरान रिश्वत का लेन-देन करके सरकारी मुलाजिमों ने अपनी ड़यूटी सही ढंग से न करके अपने ओहदों का दुरुपयोग करते हुए निजी लैबोरेट्रीज और अस्पतालों को अनुचित फायदा पहुंचाया है।
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June 25, 2020 at 04:27AM
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